होम्योपैथिक चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग इमरजेंसी में महिलाओं के प्रसव भी करा देते हैं
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार नहीं लेते हैं संज्ञान
गोरखपुर घघसरा नगर पंचायत के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ( सीएचसी) ठर्रापार में महिलाओं का प्रसव व इमरजेंसी सेवा होमियोपैथिक डाक्टरों से कराई जा रही है। मजे की बात यह है कि-महिलाओं के प्रसव उपरांत उसके प्रोत्साहन कागजात कार्य ( बी एस टी) भी उन्हीं की हस्ताक्षर से की जा रही है। यदि कोई महिला उनके कार्य में हस्ताक्षेप करता है, तो रेफर की धमकी देकर उसे चुप करा दी जाती हैं। गरीब महिलाओं की आवाज दबाने में डाक्टरों के गुर्गे भी सहयोग करते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रापार द्वारा क्षेत्र की कुल तकरीबन- एक लाख पैंतालीस हजार लोगों को सेवा दी जाती है। इस चिकित्सालय पर पड़ोस के जिले संत कबीर नगर व महाराजगंज जिले से लोग अपनी दवा करने आते रहते हैं ।
देखा जाय, तो एक माह में तकरीबन 150 से लेकर 200 डिलीवरी कार्य होती है। डाक्टर के नाम पर सीएचसी ठर्रापार मुख्यालय पर तकरीबन 42 कर्मचारी तैनात है। जिसमें चार की संख्या में एमबीबीएस डाक्टर व एक बी ए एम एस डाक्टर मौजूद हैं, जिसमें दो महिला डाक्टर हैं। कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर रात्रि निवास नहीं करता है।
इसके बावजूद भी महिलाओं के प्रसव हेतु कोई भी गाईने डॉक्टर की तैनात नहीं की गयी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आधी आबादी की सेवा नाम मात्र की है। डिलीवरी का सभी कार्य-बोझ मात्र चार स्टाफ नर्सों के कंधों पर है। भारी दबाव में रहतीहैं। नाम न छापने की शर्त पर सभी ने बताईं कि- एम बी बी एस डॉक्टर साथ मौजूद न रहने से हमें खाली पन महसूस होता है। कभी-कभी तो भारी मुश्किल में पड़ जाती हूं ।कि यदि माँ के पेट में बच्चा उल्टा हो गया। प्रसव के बाद खून का बहाव बंद नहीं हुआ ,तो जच्चा बच्चा खतरे में पड़ जाते हैं। सीजेरियन व्यवस्था न होने से मुश्किल का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
कभी-कभी तत्काल रेफर में भी भारी कठिनाई आ जाती है। एंबुलेंस का पास नहीं मिलता या बहुत देर में मिलता है। खामियाजा तो मरीज को ही भुगतना पड़ता है।
उक्त संदर्भ में- सीएमओ गोरखपुर राजेश झा ने कहा कि- होमियोपैथिक डाक्टर प्रसव नहीं करा सकते हैं। उन्हें अधिकार नहीं है। इमरजेंसी सेवा में भी एमबीबीएस डॉक्टर का होना अनिवार्य है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए हम इसकी जांच करेंगे।
