बांदा-टांडा नेशनल हाईवे एक बार फिर सड़क सुरक्षा के दावों को चुनौती देता नजर आया। तिंदवारी क्षेत्र के ग्राम छापर के पास अज्ञात वाहन की तेज रफ्तार ने एक परिवार की खुशियों को पलभर में दर्द में बदल दिया। फतेहपुर के गोधरा मऊ निवासी अभिषेक तिवारी अपनी पत्नी प्राची तिवारी और सास सुलेखा देवी के साथ बांदा जा रहे थे, लेकिन रास्ते में हुई एक लापरवाही ने उन्हें अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया।हादसे के बाद सड़क पर बिखरा खून और मदद के लिए तड़पते घायल इस बात की गवाही दे रहे थे कि हाईवे पर तेज रफ्तार और बेपरवाह वाहन चालकों का आतंक अब भी जारी है। यदि वाहन चालक दुर्घटना के बाद मौके से न भागते और यातायात नियमों का पालन होता, तो शायद ऐसी घटनाएं कम होतीं।
राहगीरों की संवेदनशीलता ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक अज्ञात वाहन लोगों की जान से खेलते रहेंगे? पुलिस ने वाहन की तलाश शुरू कर दी है, वहीं यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर सख्त निगरानी और जिम्मेदार ड्राइविंग की जरूरत को रेखांकित करता है।
