गोरखपुर-हरिद्वार स्थित कार्यालय से भेजे गए इस मांगपत्र में किसानों की आय, सामाजिक सुरक्षा और खेती की लागत को कम करने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। संगठन ने साफ कहा है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पत्र की प्रति मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, केंद्रीय कृषि मंत्री व अन्य संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।
भाकियू राष्ट्रवादी की 8 मुख्य मांगें
देश के सभी किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ हो। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक लागत + 50% लाभ पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू हो।
60 वर्ष से ऊपर के किसान और खेतिहर मजदूरों को 8,000 रुपये प्रतिमाह सम्मान पेंशन दी जाए।
300 यूनिट मुफ्त बिजली सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए किसानों को मुफ्त मिले। मंडी शुल्क, हरित सेस जैसी सभी कटौतियां खत्म हों लाभकारी मूल्य एम.यस.पी. गेहूं 3,600₹, धान 3,600₹, गन्ना 4,000₹, बाजरा 4,000₹, मक्का 10,000₹ प्रति क्विंटल MSP तय हो। कपास 12,000₹, अरहर 10,000₹, मूंग 9,000₹ प्रति क्विंटल खरीद हो।
तिलहन, गन्ना, धान, मक्का, सरसों जैसी ज्यादा पानी लेने वाली फसलों पर नियंत्रण हो और वैकल्पिक फसल योजना लागू की जाए।
बाहर से आने वाले गेहूं, चावल, दाल, फल-सब्जी पर प्रतिबंध लगे ताकि देश के किसान और उपभोक्ता दोनों सुरक्षित रहें।कृषि उत्पादों के परिवहन से ई-वे बिल की बाध्यता हटे। किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉली को टोल टैक्स से छूट मिले।विधवा पेंशन की आयु 44 वर्ष से घटाकर वार्षिक 45-60 हजार रुपये की जाए। सफाईकर्मियों की 45,000 पदों पर नियमित भर्ती हो।
पत्र के अंत में ठाकूर राम चन्द्र सिंह के साथ संगठन के अन्य पदाधिकारियों राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन गुप्ता प्रदेश महासचिव संत राज यादव गोरखपुर जिला अध्यक्ष विधि चंद बाराबंकी मंडल अध्यक्ष लखनऊ राघवेंद्र सिंह चौहान राम तेज यादव मंडल अध्यक्ष देवीपाटन रामकृपाल सिंह सुल्तानपुर राजेंद्र सोनकर बलरामपुर विनोद पटेल आलोक यादव लखनऊ इत्यादि किसान नेताओं का कहना है कि ये मांगें केवल कागज की मांग नहीं हैं, बल्कि देश के अन्नदाता के सम्मान और कृषि को आर्थिक संकट से बचाने की गारंटी है।
