बिहार विधानसभा चुनाव 2025: बदलते समीकरण और नई चुनौती
बिहार में इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास है। पिछली बार 2020 में हुए चुनाव में एनडीए (NDA) को बहुमत मिला था और जेडीयू (JDU) के नेता नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन अगस्त 2022 में नीतीश ने एनडीए से नाता तोड़कर आरजेडी (RJD) के साथ नई सरकार बनाई थी। यह गठबंधन भी ज्यादा दिन नहीं टिक पाया और जनवरी 2024 में उन्होंने फिर से पलटी मारते हुए एनडीए में वापसी कर ली।
अब 2025 में एक बार फिर बिहार की राजनीति बदलते समीकरणों के दौर से गुजर रही है। इस बार मुकाबले में एक नया नाम है — प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) और उनकी पार्टी जन सुराज। प्रशांत किशोर, जो कभी चुनावी रणनीतिकार रहे, अब खुद राजनीति में उतरकर सबका ध्यान खींच रहे हैं। उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे पारंपरिक दलों में हलचल मची है।
आरजेडी जहां यादव-मुस्लिम समीकरण पर भरोसा कर रही है, वहीं जेडीयू अपनी शासन नीतियों और विकास योजनाओं को मुद्दा बना रही है। भाजपा (BJP) मोदी की लोकप्रियता के सहारे मैदान में है, जबकि कांग्रेस अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।
इस बार मतदाताओं के सामने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे हैं। जातीय राजनीति अब भी असरदार है, लेकिन युवा मतदाता विकास की उम्मीद कर रहे हैं।
देखना यह है कि क्या जन सुराज जैसी नई ताकत पारंपरिक राजनीति को चुनौती दे पाएगी या फिर बिहार एक बार फिर पुरानी राजनीतिक धारा में लौट जाएगा।
