ब्यूरो चीफ सुजीत कुमार
कानपुर के काल भैरव मंदिर में भगवान शिव के रुद्र रूप काल भैरव की जयंती 12 नवंबर को हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। बता दे कि इस वर्ष अश्लेषा और मघा नक्षत्र में काशी के कोतवाल का पूजन कर श्रद्धालु दाल, बाटी और चूरमे का भोग लगाएंगे। इस अवसर पर मंदिर को फूलों का रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है और काल भैरव जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों से पर चल रही है, वही मीडिया से बात करते हुए पंडित विकास शुक्ला ने बताया कि काल भैरव मंदिर में बाबा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, इस वर्ष मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 12 नवंबर को पड़ रही है, जिसमे ब्रह्म योग रहेगा। यह दोनों योग ज्योतिष में शुभ बताए गए है। यह योग आध्यात्मिक उन्नति और पवित्रता देने वाले है। उन्होंने बताया कि काल भैरव की पूजा से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर होती है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए काल भैरव की पूजा विशेष लाभदायक है। ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए और अकाल मृत्यु का भय भी साधना से दूर होता है। शहर के काल भैरव मंदिर में कानपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं, जिसको लेकर मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई है ।।
