Banka Election 2025 LIVE: बांका की महिलाओं ने नक्सलियों को दिया जवाब, बढ़-चढ़कर किया मतदान — लोकतंत्र के पर्व में महिला शक्ति का ऐतिहासिक प्रदर्शन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत बांका जिले में आज का दिन महिला मतदाताओं की भागीदारी के नाम रहा। लंबे समय से नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में इस बार महिलाओं ने जबरदस्त साहस और उत्साह दिखाया। वे सुबह से ही घरों से निकलकर मतदान केंद्रों की ओर बढ़ीं और लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई।
सुबह-सुबह बूथों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़
बांका जिले के कटोरिया, बेलहर, धोरैया, अमरपुर और शंभुगंज विधानसभा क्षेत्रों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें दिखीं।
कई जगहों पर तो महिलाएं मतदान शुरू होने के समय सुबह 7 बजे से पहले ही बूथ पर पहुंच गईं।
कटोरिया प्रखंड के पनराडीह गांव की 65 वर्षीय कमला देवी ने कहा —
“पहले डर के कारण महिलाएं घर में रहती थीं, लेकिन अब हम समझ चुके हैं कि वोट देना ही असली ताकत है।”
उनके साथ बूथ पर खड़ी 25 वर्षीय रीना कुमारी ने कहा —
“अब हम डरने वाले नहीं, हम तय करेंगे कि हमारे क्षेत्र का भविष्य कैसा होगा।”
नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में अभूतपूर्व मतदान
बांका जिले के कई इलाके पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के रूप में जाने जाते थे।
कटोरिया, धोरैया और बेलहर के कई गांवों में लंबे समय तक लोग सुरक्षा कारणों से मतदान में भाग नहीं लेते थे।
लेकिन इस बार प्रशासन की सख्त सुरक्षा व्यवस्था और बढ़े हुए विश्वास ने महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया।
कटोरिया थाना क्षेत्र के चांदन घाटी, झौवा, कुंडा और घोघरडीह गांवों में महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।
पहले जहां बूथों पर सन्नाटा रहता था, वहां इस बार महिलाओं की पंक्तियां सैकड़ों मीटर लंबी थीं।
एसपी सत्य प्रकाश शर्मा ने बताया —
“इस बार नक्सल प्रभावित इलाकों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती और जनता के सहयोग से शांतिपूर्ण मतदान हो रहा है।”
महिलाओं का साहस: लोकतंत्र में नया संदेश
नक्सलियों के डर के बीच वोट डालने आई महिलाओं ने साहस की एक नई मिसाल पेश की है।
बेलहर की रहने वाली पार्वती हेंब्रम, जो जंगल क्षेत्र के गांव से मतदान केंद्र तक तीन किलोमीटर पैदल चलीं, ने कहा —
“पहले कहा जाता था कि यहां वोट डालना खतरे से खाली नहीं, लेकिन आज हमने डर को हराया है।”
उनके साथ आईं उनकी पड़ोसी मंजू देवी ने बताया कि इस बार गांव की महिलाओं ने तय किया था कि “कोई भी घर में नहीं रहेगा, सब वोट डालने जाएंगे।”
प्रशासन की तैयारियों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
बांका जिला प्रशासन ने मतदान से पहले नक्सल क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया था।
अर्धसैनिक बलों की 38 कंपनियां और बिहार पुलिस की विशेष इकाइयां मतदान दिवस पर तैनात थीं।
प्रत्येक बूथ पर महिला पुलिस कर्मियों की मौजूदगी ने महिलाओं को मतदान के लिए अतिरिक्त भरोसा दिया।
साथ ही बूथों पर सीसीटीवी कैमरे, सौर ऊर्जा लाइटें, पीने के पानी, और प्राथमिक उपचार केंद्रों की व्यवस्था की गई थी।
डीएम अभिषेक चौधरी ने बताया —
“हमने महिलाओं के लिए विशेष बूथ बनाए हैं जिन्हें ‘सखी मतदान केंद्र’ नाम दिया गया है। इन केंद्रों पर सभी कर्मी महिलाएं हैं, ताकि मतदाताओं को सुविधा और सुरक्षा महसूस हो।”
मतदान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार बांका जिले में महिलाओं की मतदान दर 67 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो पिछले चुनाव से 13 प्रतिशत अधिक है।
कुछ नक्सल प्रभावित गांवों में तो महिला मतदान पुरुषों से भी अधिक दर्ज किया गया।
धोरैया प्रखंड के कटरा गांव में मतदान प्रतिशत 74 तक पहुंच गया, जबकि कटोरिया के चांदन घाटी क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने मतदान किया।
महिलाओं की प्रेरक कहानियां
कई प्रेरक कहानियां आज बांका की धरती से सामने आईं —
70 वर्षीय फूलो देवी अपने बेटे के सहारे बूथ तक पहुंचीं और मुस्कुराते हुए बोलीं — “हमने आज नक्सलियों को जवाब दिया है कि डर अब खत्म।”
छात्रा अंजलि कुमारी ने अपनी सहेलियों के साथ “वोट करो, बदलाव लाओ” का नारा लगाते हुए समूह में वोट डाला।
नवजोत कौर, जो हाल ही में पुलिस विभाग में चयनित हुई हैं, ने कहा — “महिलाएं अब किसी के दबाव में नहीं आतीं, वे अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगी।”
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
राजनीतिक दलों ने भी महिलाओं की भागीदारी की सराहना की।
राजद प्रत्याशी जयप्रकाश यादव ने कहा —
“यह चुनाव बिहार की महिलाओं की जागरूकता का प्रमाण है। उन्होंने दिखा दिया कि वे लोकतंत्र की असली शक्ति हैं।”
वहीं भाजपा प्रत्याशी सत्येंद्र सिंह ने कहा —
“बांका की महिलाओं ने आतंक और भय के खिलाफ लोकतंत्र का उत्सव मनाया है। यह पूरे बिहार के लिए प्रेरणादायक है।”
सामाजिक संगठनों की भूमिका
बांका जिले में कई सामाजिक संगठनों ने चुनाव से पहले ग्रामीण महिलाओं में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया।
‘जन चेतना अभियान’ और ‘महिला विकास मंच’ ने गांव-गांव जाकर महिलाओं से कहा कि “जो वोट नहीं देता, वही परिवर्तन की शिकायत करता है।”
इन अभियानों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं समूह बनाकर मतदान केंद्रों तक गईं।
लोकतंत्र का नया अध्याय
बांका में महिलाओं की इस सक्रियता ने लोकतंत्र के एक नए युग की शुरुआत की है।
पहले जो क्षेत्र भय और बंदूक की छाया में रहते थे, वहां आज लोकतंत्र की आवाज गूंज रही है।
नक्सलियों की धमकियों के बावजूद महिलाओं ने अपने वोट से स्पष्ट संदेश दिया है —
“अब विकास ही हमारी प्राथमिकता है, डर नहीं।”
कटोरिया की महिला मतदाता रेखा देवी ने कहा —
“अबकी बार हम डर को नहीं, विकास को वोट दे रहे हैं। जो सड़क, स्कूल और अस्पताल बनाएगा, वही हमारा नेता होगा।”
निष्कर्ष
बांका जिले की महिलाओं ने आज इतिहास रच दिया।
उनकी हिम्मत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र केवल पुरुषों का अधिकार नहीं, बल्कि महिलाओं की समान भागीदारी से ही मजबूत होता है।
नक्सलियों के भय को पीछे छोड़, गांव की महिलाओं ने न केवल मतदान किया, बल्कि पूरे बिहार को यह संदेश दिया कि डर से बड़ा होता है लोकतंत्र का विश्वास।
आज बांका की धरती पर हर वोट यह कह रहा था —
“हमने डर को हराया, और लोकतंत्र को जिंदा रखा।”
