Madhubani Election 2025 LIVE: पोलिंग बूथ के बाहर महिलाओं की लंबी कतार, लोकतंत्र के पर्व में उमड़ा उत्साह
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत मधुबनी जिला आज मतदान के जोश से सराबोर है। सुबह से ही मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, खासकर महिलाओं में। जिले के कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें लगी हैं। लोकतंत्र के इस पर्व में महिलाएं किसी से पीछे नहीं रहीं और भारी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचीं।
सुबह-सुबह उमड़ा मतदान का उत्साह
मधुबनी के राजनगर, झंझारपुर, बेनीपट्टी, फूलपरास, और बिस्फी विधानसभा क्षेत्रों में मतदान केंद्र खुलने के साथ ही महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
कई केंद्रों पर सुबह 6:30 बजे से ही मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।
राजनगर प्रखंड के मध्य विद्यालय बूथ संख्या 118 पर पहली मतदाता बनीं 72 वर्षीय शांति देवी ने कहा —
“हमने आज लोकतंत्र की ताकत को महसूस किया। बरसों से वोट डाल रही हूं, लेकिन इस बार जो उत्साह है, वो पहले कभी नहीं देखा।”
वहीं झंझारपुर की शिक्षिका सरिता झा ने कहा —
“महिलाओं की भागीदारी ही बिहार की बदलती सोच को दिखा रही है। हम अब सिर्फ घर नहीं, समाज और राजनीति की दिशा तय कर रहे हैं।”
कई केंद्रों पर महिलाओं की लाइनें पुरुषों से लंबी
मधुबनी जिले में लगभग हर बूथ पर महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों से अधिक देखी गई।
बेनीपट्टी, मधवापुर, और खजौली के मतदान केंद्रों पर महिलाओं की कतारें सैकड़ों मीटर लंबी रहीं।
फूलपरास की गृहिणी राधा देवी ने कहा —
“पहले डर या उदासीनता के कारण कई महिलाएं वोट नहीं देती थीं, लेकिन अब सब समझ चुकी हैं कि वोट ही उनकी आवाज है।”
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, दोपहर तक जिले में कुल 43 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 46 प्रतिशत रही।
प्रशासन ने की सख्त सुरक्षा व्यवस्था
मधुबनी जिला प्रशासन ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की थी।
40 कंपनी अर्धसैनिक बल, महिला पुलिस बल, और होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई थी।
सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और ड्रोन सर्विलांस किया गया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया —
“मधुबनी में अब तक मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण है। महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत कर रही है।”
महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
इस बार के चुनाव में महिलाओं ने मतदान केंद्रों को अपने उत्सव स्थल में बदल दिया।
कई बूथों को ‘सखी मतदान केंद्र’ के रूप में सजाया गया, जहां मतदान कर्मी, सुरक्षा बल और पर्यवेक्षक — सभी महिलाएं थीं।
इन केंद्रों को गुलाबी रंग से सजाया गया था और प्रवेश द्वार पर ‘मतदान मेरा अधिकार है’ का नारा लिखा था।
राजनगर के सखी मतदान केंद्र संख्या 156 पर मतदाता प्रिया कुमारी ने कहा —
“आज हमें गर्व है कि महिलाओं के लिए विशेष केंद्र बनाए गए हैं। इससे हम सहज महसूस कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा महिलाएं वोट देने आ रही हैं।”
गांवों में भी दिखा महिला नेतृत्व
मधुबनी जिले के गांवों में पंचायत प्रतिनिधियों और महिला स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित किया।
झंझारपुर की सरपंच मीना देवी ने कहा —
“हमने गांव-गांव में अभियान चलाया कि हर महिला वोट डाले। अब महिलाएं समझ गई हैं कि राजनीति से दूरी नहीं, भागीदारी जरूरी है।”
बेनीपट्टी के दलित टोले में भी महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचीं।
पहली बार वोट डालने वाली काजल पासवान ने कहा —
“यह मेरे जीवन का खास दिन है। वोट डालकर मुझे लगा कि मैं अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दे रही हूं।”
राजनीतिक दलों की नज़र महिला वोट पर
मधुबनी की राजनीति में हमेशा महिला वोट निर्णायक रहे हैं।
इस बार भी सभी प्रमुख दलों ने महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन जैसे मुद्दों को अपने एजेंडे में रखा।
राजद प्रत्याशी चंद्रिका झा ने कहा —
“महिलाओं ने बिहार की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। उनका यह जोश सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।”
भाजपा प्रत्याशी अजय चौधरी ने कहा —
“मधुबनी की महिलाओं ने लोकतंत्र के प्रति जो जागरूकता दिखाई है, वह प्रेरणादायक है। यह बिहार की नई ताकत है।”
मतदान प्रतिशत और रुझान
सुबह 9 बजे तक मधुबनी जिले में 20.8 प्रतिशत, दोपहर 12 बजे तक 39.5 प्रतिशत, और दोपहर 2 बजे तक 52.4 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, शाम तक यह आंकड़ा 68 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचने की उम्मीद है।
इसमें महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, और कई मतदान केंद्रों पर महिला मतदान दर 70 प्रतिशत से ऊपर दर्ज की गई है।
महिलाओं की कहानियां बनीं प्रेरणा
70 वर्षीय जानकी देवी (राजनगर) ने कहा — “हमने आज अपनी अगली पीढ़ी के लिए वोट डाला। डरने का वक्त गया, अब सोचने और बदलने का वक्त है।”
झंझारपुर की शिक्षिका ममता सिंह ने कहा — “महिलाएं अब विकास की सबसे बड़ी आवाज हैं।”
बेनीपट्टी की छात्रा प्राची कुमारी ने बताया — “पहली बार वोट डालना बहुत गर्व की बात है। हर लड़की को वोट देना चाहिए।”
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत — महिला मतदाता
मधुबनी की यह तस्वीर साबित करती है कि बिहार की महिलाएं अब लोकतंत्र की दिशा तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
नक्सल और सामाजिक बाधाओं से ऊपर उठकर उन्होंने मतदान को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है।
राजनगर की बुजुर्ग मतदाता कमला देवी ने कहा —
“हम अब किसी डर या लालच में नहीं आते। हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए वोट देते हैं।”
निष्कर्ष
मधुबनी की महिलाओं ने आज यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र का भविष्य उनके हाथों में है।
उन्होंने लंबी कतारों, धूप और प्रतीक्षा की परवाह किए बिना अपने अधिकार का प्रयोग किया और यह संदेश दिया कि विकास, शिक्षा और समानता ही अब उनकी प्राथमिकता है।
आज मधुबनी का हर मतदान केंद्र यह कह रहा था —
“वोट देना अब जिम्मेदारी नहीं, गर्व की पहचान है।
