आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतिः जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह
श्रीकृष्ण भास्कर सह संपादक अब तक न्याय न्यूज आपको अवगत कराते चलें कि
आयुर्वेद विश्व की प्रचीनतम चिकित्सा पद्धति है जो दस हजार वर्ष से भारतीय भूभाग में व्ययवहार में है। यह चिकित्सापद्धति पूर्णतः वैज्ञानिक है जिसके सिद्धान्त वैदिक वाड.मय से लेकर संहिता ग्रन्थों तक विस्तृत रुप से उपलब्ध हैं। ज्ञानेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी पीलीभीत ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय में बी.ए.एम.एस. एवं एम. डी. आयुर्वेद पाठ्यक्रमों में नवप्रवेशित छात्रों के ट्रान्जीशनल करीकुलम के प्रारम्भ के अवसर पर उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। जिलाधिकारी ने आयुर्वेद की औषधियों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि नालन्दा विश्वविद्यालय को जलाने वाले बख्तियार खिलजी को भी स्वयं की चिकित्सा के लिए आयुर्वेद की शरण लेनी पड़ी थी और आयुर्वेद चिकित्सा से ही वह पुनः स्वस्थ हुआ था। वर्तमान समय में विश्वभर में आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ी है तथा साथ ही आयुर्वेद की औषधियों की मांग भी बढ़ी है। जनसामान्य में आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ रही है किन्तु अच्छी गुणवत्तापरक चिकित्सा के माध्यम से आयुर्वेद के प्रचार प्रसार का उत्तरदायित्व आयुर्वेद के छात्रों, चिकित्सकों एवं शिक्षकों का है।
इस अवसर पर कालेज के प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार में अतिथियों एवं नवागंतुक छात्रों का स्वागत करते हुए संस्था के गौरवपूर्ण इतिहास का उल्लेख किया। प्रो. बेदार कहा कि ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय देश का प्राचीनतम आयुर्वेद महाविद्यालय है तथा इस महाविद्यालय के स्नातक तथा स्नातकोत्तर छात्र देशभर के विभिन्न आयुर्वेद संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संस्था का शैक्षणिक रिकार्ड उत्कृष्ट रहा है तथा सभी प्रवेशित छात्रों का भविष्य उज्जवल है।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तीकरण योजना के अंतर्गत संस्था के बी.ए.एम.एस. छात्रों को टेबलेट भी वितरित किए। जिलाधिकारी द्वारा संस्था के वनौषधि उद्यान में शाल के दो पौधों का रोपण भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डा. हरि शंकर मिश्र ने किया। इस अवसर पर संस्था के शिक्षक प्रो. अनुराधा, प्रो. अजय कुमार, प्रो. अजय कुमार अग्रवाल, डा. के.पी.सिंह, डा. दिव्याभ, डा. अखिलेश कुमार आदि, समस्त स्नातक तथा परास्नातक छात्र उपस्थित रहे।

