प्रदेश के 74 जनपदों के लिए रवाना हुए 75 संविधान रथ
लखनऊ से भव्य संविधान रथ यात्राओं का शुभारंभ
लखनऊ, 28 जनवरी।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को भव्य संविधान रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. आंबेडकर भवन, विधानसभा के सामने से प्रदेश के 74 जनपदों के लिए 75 संविधान रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
संविधान रथ यात्राओं का शुभारंभ मा. लोकपाल लखनऊ डॉ. आर. आर. जैसवार एवं मा. पी. सी. कुरील द्वारा संयुक्त रूप से तिरंगा झंडा दिखाकर किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के नारों से गूंज उठा। रथों पर भारत के संविधान की प्रस्तावना, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार, मौलिक अधिकार, कर्तव्य एवं सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश अंकित थे।
संविधान रथ यात्रा संयोजक मंडल के संयोजक रामचन्द्र पटेल ने बताया कि 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ था। संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक जनपद में एक-एक संविधान रथ भेजा जा रहा है, जो गांव-गांव जाकर नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित कराएगा।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे समावेशी और लोकतांत्रिक संविधान है। यह वंचित, शोषित, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों का सुरक्षा कवच है। उन्होंने युवाओं से संविधान को पढ़ने, समझने और उसकी रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
मा. पी. सी. कुरील ने कहा कि संविधान रथ यात्रा एक वैचारिक आंदोलन है, जो समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत करता है। वहीं मा. लोकपाल डॉ. आर. आर. जैसवार ने इसे संविधान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में समयानुकूल पहल बताया।
कार्यक्रम में सी. एल. राजन, अशोक कुमार, मोहम्मद सईद सिद्दीकी, डॉ. सत्यवती दोहरे सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। अंत में यह संकल्प लिया गया कि संविधान रथ यात्राओं के माध्यम से प्रदेश भर में संविधान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

