नक्शों में दर्ज, जमीन पर गायब चकरोड़ की हकीकत
भिटरिया में सौ तेइस नंबर भूमि पर कब्जे का आरोप, प्रशासन कठघरे में
करछना, प्रयागराज। करछना तहसील के भिटरिया गांव में सौ तेइस नंबर की चकरोड़ भूमि को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। राजस्व अभिलेखों और सरकारी नक्शों में दर्ज यह चकरोड़ जमीनी हकीकत में सिकुड़ती दिख रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमाफियाओं ने सरकारी रास्ते और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। गांव के किसानों का कहना है कि चकरोड़, तालाब और खाद गड्ढ़ा जैसी महत्वपूर्ण जमीनों पर कब्जे के कारण खेतों तक पहुंच बाधित हो गई है। कई बार तहसील और जिला स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ आश्वासन तक सीमित रही। इससे ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।प्रदेश में भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त अभियान के दावों के बीच भिटरिया का मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी आदेशों के बावजूद जमीन खाली नहीं कराई जा रही, जिससे कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं। इस मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने भी कड़ा रुख अपनाया है।संगठन के प्रदेश महामंत्री ठाकुर कृष्णराज सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक और निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार यह आंदोलन तहसील या जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजधानी स्तर तक गूंज सकता है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासनों पर भरोसा नहीं रहा। उनका साफ कहना है कि यदि जल्द अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो गांव से उठी आवाज बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है। भिटरिया की सौ तेइस नंबर चकरोड़ फिलहाल सवालों के घेरे में है। क्या सरकारी जमीन कागजों तक ही सीमित रहेगी, या प्रशासन सख्ती दिखाकर कब्जा मुक्त कराएगा? पूरे क्षेत्र की निगाहें अब कार्रवाई पर टिकी हैं।

