गन्ना विकास परिषद पूरनपुर के तत्वावधान में ग्राम पंचायत दूधिया खुर्द के पंचायत घर में आयोजित गन्ना किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को नई तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी देते हुए 91269 गन्ना किस्म की बुवाई तुरंत बंद करने की सख्त सलाह दी।
कार्यक्रम में शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि 91269 किस्म चीनी मिलों के लिए “सफेद हाथी” साबित हो रही है, क्योंकि इससे शक्कर की रिकवरी बेहद कम मिल रही है। वैज्ञानिकों ने कहा कि अगेती और अस्वीकृत किस्मों के बीच लगभग 45 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है, जिससे किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे केवल उन्हीं गन्ना किस्मों की खेती करें जो अधिक उत्पादन और बेहतर रिकवरी देने वाली हों। विशेषज्ञों की टीम ने यूपी 05225 और 98014 किस्मों को खेती के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया। उनके अनुसार ये किस्में तेजी से बढ़ती हैं, वजन में अधिक होती हैं और किसानों को बेहतर लाभ दिलाने में सक्षम हैं।
इसके साथ ही जंगल के किनारे स्थित खेतों के लिए 10230 किस्म को बेहद उपयोगी बताया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस किस्म की बनावट ऐसी होती है कि सियार और लोमड़ी जैसे जंगली जानवर इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाते, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है।
कार्यक्रम में जिला गन्ना अधिकारी एवं पूरनपुर चीनी मिल के प्रभारी खुशीराम भार्गव तथा पूरनपुर चीनी मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी अमित कुमार चतुर्वेदी विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से कहा कि बेहतर मूल्य पाने के लिए वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। घटिया और अस्वीकृत किस्मों की बुवाई से न केवल मिल की रिकवरी प्रभावित होती है बल्कि किसानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
इस अवसर पर शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय तिवारी, डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. सुजीत प्रताप सिंह ने किसानों को गन्ना उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां दीं। कार्यक्रम में इफको के महेंद्र मौर्य, शिवम वाजपेयी, जावेद बेग सहित कई गन्ना पर्यवेक्षक और क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
