वर्दी में दिखी भक्ति की शक्ति, पुलिस ने जीता जनता का दिल
लालापुर,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत थाना लालापुर ने गुरुवार को एक ऐसा दृश्य रच दिया, जिसने कानून की सख्त छवि के पीछे छिपे संवेदनशील और सांस्कृतिक चेहरे को उजागर कर दिया। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर थाना परिसर केवल सुरक्षा का केंद्र नहीं रहा, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम बन गया। शाम होते ही थाना परिसर में दीपों की आभा और भक्ति की स्वर लहरियां फैलने लगीं। ठीक छह बजे शुरू हुआ सुंदरकांड पाठ धीरे-धीरे ऐसी दिव्यता में बदल गया, जिसने मौजूद हर व्यक्ति को भावविभोर कर दिया। “जय श्रीराम” और “बजरंगबली की जय” के उद्घोष से पूरा वातावरण थर्रा उठा। करीब दो से तीन घंटे तक चला यह आयोजन मानो समय को भी थामे रहा। इस भव्य आयोजन के सूत्रधार रहे थाना प्रभारी अनुभव सिंह, जिनकी पहल ने पुलिस महकमे की एक अलग ही तस्वीर पेश की। उनकी अगुवाई में वर्दीधारी जवानों ने केवल ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि आस्था में डूबकर समाज के साथ एक आत्मिक रिश्ता भी कायम किया। हेड कांस्टेबल राधा मोहन, उदय भानू, उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह समेत पूरा पुलिस बल श्रद्धा में लीन नजर आया। सबसे खास बात यह रही कि जहां आमतौर पर थाना परिसर में सख्ती और अनुशासन की छवि हावी रहती है, वहीं इस आयोजन ने उस छवि को मानवीयता और आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया। वर्दी में बैठे पुलिसकर्मी जब भक्तिभाव से सुंदरकांड का पाठ करते दिखे, तो यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल ही नहीं, बल्कि गर्व का विषय बन गया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान अमिलिया राजू पंडा और वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र पांडे, (लालापुर) वरिष्ठ पत्रकार पीसी पांडे,(गोबरा तरहार) की मौजूदगी ने इसे सामाजिक सहभागिता का स्वरूप दिया। स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को जन-आस्था का उत्सव बना दिया। थाना परिसर एक शाम के लिए मंदिर में परिवर्तित हो गया, जहां हर चेहरा भक्ति में रमा दिखा। इस आयोजन ने एक गहरा संदेश छोड़ा—पुलिस केवल कानून की रखवाली नहीं करती, बल्कि समाज की भावनाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर की भी संरक्षक है। जब प्रशासन और जनता के बीच ऐसा आत्मीय जुड़ाव बनता है, तो भरोसा मजबूत होता है और सामाजिक समरसता की नींव और भी गहरी हो जाती है। हनुमान जयंती पर थाना लालापुर का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उस बदलते सामाजिक ताने-बाने की तस्वीर बन गया, जहां वर्दी और श्रद्धा साथ-साथ चलती नजर आई।
