पीलीभीत जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए गुरुवार को गांधी प्रेक्षागृह में स्वास्थ्य सखी उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में स्वास्थ्य सखियों को गांव-गांव जागरूकता फैलाने और महिलाओं-बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का संकल्प दिलाया गया।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्य सखियों की भूमिका को विस्तार से समझाया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला मिशन प्रबंधक प्रदीप कुमार गौतम ने किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सखियां स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल स्तरीय संघों से जुड़ी महिलाओं के बीच पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन लाने का कार्य कर रही हैं।
जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने स्वास्थ्य सखियों से वीएचएसएनडी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने, बाल विवाह रोकने, कन्या सुमंगला योजना, आयुष्मान कार्ड, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जैसी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी पर चिंता जताते हुए एनीमिया मुक्त समाज बनाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया।
मुख्य विकास अधिकारी ने सहजन के पोषण और औषधीय गुणों की जानकारी देते हुए कहा कि यह कैंसर रोधी गुणों से भरपूर है और ग्रामीण परिवारों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी ने महिलाओं के टीकाकरण, गर्भावस्था पंजीकरण, खून की जांच और आयुष्मान गोल्ड कार्ड बनवाने को लेकर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में बीसलपुर की स्वास्थ्य सखी मैविश खान, ललौरीखेड़ा की मोबीन और मरौरी की ममता ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जागरूकता और सामुदायिक सहयोग से ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
कार्यशाला में मौजूद अधिकारियों और अतिथियों ने स्वास्थ्य सखियों के कार्यों की सराहना करते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। अंत में उपायुक्त स्वतः रोजगार श्रीमती वंदना सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य सखियों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित सभी स्वास्थ्य सखियों की स्व-गणना भी कराई गई।
