आमोद कुमार
बांदा, 16 मई 2026। खेल केवल शरीर की शक्ति का नहीं, बल्कि मन, रणनीति और अनुशासन के समन्वय का नाम है—और यही संदेश जेएन कॉलेज कबड्डी ग्राउंड में आयोजित एकदिवसीय कबड्डी मैत्री प्रतियोगिता ने सशक्त रूप से दिया। पूरे दिन मैदान संघर्ष, कौशल और उत्साह का साक्षी बना रहा, जहां सात टीमों ने अपने दमखम से खेल को जीवंत कर दिया।आल्हा योद्धा, मलखान राइडर्स, जेएन योद्धा, जेके स्टार, बांदा दबंग, भागवत अकैडमी और पुलिस क्लब—इन सभी टीमों ने यह सिद्ध किया कि कबड्डी केवल एक खेल नहीं, बल्कि सामूहिक समर्पण और त्वरित निर्णय क्षमता की परीक्षा है। उद्घाटन मुकाबले में आल्हा योद्धा ने पुलिस क्लब को 31-23 से हराकर बढ़त बनाई, तो वहीं जेएन योद्धा ने भागवत अकैडमी को 38-29 से पराजित कर अपनी मजबूत दावेदारी प्रस्तुत की। जेके स्टार ने भी मलखान राइडर्स को 29-26 से हराकर प्रतियोगिता को रोमांचक मोड़ दिया।
सेमीफाइनल में बांदा दबंग का प्रदर्शन निर्णायक और आक्रामक रहा, जिसने आल्हा योद्धा को 37-17 के बड़े अंतर से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। यह जीत केवल स्कोर की नहीं, बल्कि रणनीति और संयम की जीत थी।फाइनल मुकाबला जेएन योद्धा और बांदा दबंग के बीच हुआ, जो कबड्डी के वास्तविक सौंदर्य—संघर्ष और संतुलन—का प्रतीक बन गया। दोनों टीमों ने 15-15 मिनट के दो हाफ में अंतिम क्षण तक मुकाबला जीवंत रखा, परंतु युवराज, अंकित, गुप्टिल और मयंक के संयमित और रणनीतिक खेल ने जेएन योद्धा को 23-18 से विजय दिलाई। यह जीत केवल एक टीम की नहीं, बल्कि उस विचार की विजय थी जिसमें तैयारी, अनुशासन और एकता को सर्वोपरि माना गया।
रेफरी अमित, प्रवीण, जिया, रितु एवं खुशबू ने निष्पक्षता के साथ खेल की गरिमा को बनाए रखा, जिससे प्रतियोगिता की विश्वसनीयता और भी सुदृढ़ हुई।समाजसेवी अरुणेश सिंह द्वारा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन और पुरस्कार वितरण यह दर्शाता है कि जब समाज खेल के साथ खड़ा होता है, तो प्रतिभा को नई दिशा मिलती है। वहीं आयोजकों—जिलाध्यक्ष अंकित कुशवाहा, जिला सचिव कमल सिंह यादव और जिला कोषाध्यक्ष सुनील सक्सेना—ने इसे केवल आयोजन नहीं बल्कि खेल संस्कृति के विस्तार का माध्यम बताया।निःसंदेह यह प्रतियोगिता इस विचार को और मजबूत करती है कि खेल केवल जीत-हार का मंच नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन और सामूहिक चेतना का जीवंत विद्यालय है।
