ऐतिहासिक जनसभा
ऐतिहासिक जनसभा
राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों का जुटान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
सिधौली / बहादुरपुर / सीतापुर
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज सिधौली क्षेत्र के बहादुरपुर स्थित डॉ. अंबेडकर पार्क में प्रातः 10:00 बजे से बहुजन समाज, किसानों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों तथा सामाजिक न्याय के समर्थकों का विशाल जनसमूह एकत्रित होना शुरू हो गया। समय बीतने के साथ जनसभा में उपस्थित लोगों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई। कार्यक्रम में गांव-गांव से पहुंचे महिला एवं पुरुषों ने भाग लेकर बहुजन एकता, संविधान सम्मान और सामाजिक न्याय के पक्ष में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का नेतृत्व राजेश कुमार सिद्धार्थ, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ द्वारा किया गया। सभा के उपरांत उप जिलाधिकारी सिधौली के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया, जिसमें बहुजन समाज के सम्मान, महापुरुषों की प्रतिमा स्थापना, किसानों की समस्याओं, युवाओं की बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया।
सभा का शुभारंभ बहुजन समाज में जन्मे महान महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए किया गया। उपस्थित जनसमूह ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार ई.वी. रामासामी, महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, मान्यवर कांशीराम, ललई सिंह यादव, संत रविदास, वीरांगना ऊदा देवी पासी तथा परमवीर अब्दुल हमीद सहित अनेक महापुरुषों को याद करते हुए उनके संघर्षों और योगदान पर प्रकाश डाला।
सभा को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, समान अधिकार और बहुजन समाज के सम्मान की लड़ाई का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि आज समाज का वंचित, शोषित और पिछड़ा वर्ग जिस शिक्षा, सम्मान, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी तक पहुंचा है, वह भारतीय संविधान की देन है।
उन्होंने कहा कि यदि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका न निभाई होती तो समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी शिक्षा, सम्मान और अधिकारों से वंचित होता। इसलिए समाज को अपने इतिहास और अपने महापुरुषों को पहचानना होगा तथा उनके बताए रास्ते पर चलना होगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर, गौतम बुद्ध या बहुजन महापुरुषों की प्रतिमा स्थापना के लिए अनुमति आवश्यक है, तो समान नियम सभी समुदायों और स्थलों पर लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज किसी विशेष धर्म या जाति के खिलाफ नहीं बल्कि समानता और न्याय के पक्ष में संघर्ष कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भी कई स्थानों पर बहुजन महापुरुषों के सम्मान में भेदभाव किया जाता है, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार का भेदभाव बंद नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सभा में किसानों की समस्याओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि किसान लगातार कर्ज, महंगाई, खाद-बीज संकट और फसलों के उचित मूल्य न मिलने से परेशान हैं। उन्होंने किसानों का कर्ज माफ करने, मुफ्त खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गांव का किसान दिन-रात मेहनत करके देश का पेट भरता है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशान वही है। सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे नौजवान रोजगार के लिए भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, भर्ती में देरी और अवसरों की कमी से युवा निराश हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।
महिलाओं के सम्मान और भागीदारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, जिसके कारण आज महिलाएं राष्ट्रपति, सांसद, विधायक, अधिकारी और न्यायपालिका तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
सोनम गौतम ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बहनों को अब अन्याय और शोषण के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होंगी तभी समाज मजबूत होगा।
बंसराज भारती ने कहा कि 152 विधानसभा सिधौली में राजेश कुमार सिद्धार्थ बिना किसी निजी स्वार्थ के जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को समाज का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने जनता से तन, मन और धन से सहयोग करने की अपील की।
प्रदीप बौद्ध ने कहा कि हमें बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के विचारों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे का संदेश जन-जन तक पहुंचाना समय की मांग है। उन्होंने समाज को शिक्षित, जागरूक और संगठित बनाने पर जोर दिया।
प्रताप सिंह त्यागी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवर्तन संघर्ष से आता है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहना होगा और एकजुट होकर अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी।
अनुज कुमार गौतम ने कहा कि प्रत्येक गांव में जागरूकता टोली बनाई जाए जो अन्याय और शोषण के खिलाफ लोगों को जागरूक करे। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर संगठन मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. राम अवतार भारतीय ने कहा कि समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा तब तक अधिकारों की लड़ाई मजबूत नहीं हो सकती।
नंदलाल गौतम ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बड़ी क्रांति गरीब, मजदूर और मेहनतकश समाज ने की है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक होना होगा।
गजोधर प्रसाद ने कहा कि उनका जीवन बहुजन समाज के सम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना होगा।
लक्ष्मी गौतम ने कहा कि अन्याय का जवाब संगठित संघर्ष से दिया जाएगा। उन्होंने महिलाओं और युवाओं से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
विनोद कुमार गौतम ने समाज को तोड़ने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताकत है।
ज्ञानेंद्र कुमार गौतम ने कहा कि जनता अब जाग चुकी है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय सामाजिक परिवर्तन का समय होगा।
सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आगामी चुनावों में जनता उन प्रतिनिधियों से जवाब मांगे जो पांच वर्षों तक जनता की समस्याओं पर मौन रहे। उन्होंने कहा कि वोट जाति, धर्म और लालच के आधार पर नहीं बल्कि संघर्ष, ईमानदारी और सामाजिक न्याय के आधार पर दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान जनसमूह ने एक स्वर में जोरदार नारे लगाए— “जय भीम!” “संविधान बचाओ!” “बहुजन सम्मान हमारा अधिकार!” “अन्याय बंद करो!” “राजेश कुमार सिद्धार्थ संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं!”
सभा के अंत में निर्णय लिया गया कि यदि क्षेत्र में बहुजन महापुरुषों के सम्मान, प्रतिमा स्थापना, विचार गोष्ठियों और समान अधिकारों पर भेदभाव जारी रहा तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम में बाबूलाल गौतम, अशोक कुमार गौतम, राजेश कुमार, आदित्य कुमार, अनवर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीणजन, किसान, महिलाएं एवं युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि संविधान, सम्मान, समानता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आंदोलन है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।

