रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय
देश के वरिष्ठ प्रशासक, प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव एवं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र से कल अपराह्न लगभग 4 बजे नई दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति हाउस (प्रधानमंत्री संग्रहालय) में शिक्षाविद एवं समाजसेवी डॉ अम्मार रिजवी की एक महत्वपूर्ण एवं विस्तृत भेंट हुई। लगभग एक घंटे चली इस मुलाकात में देश, प्रदेश, धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक विकास तथा जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की गई।
भेंट के दौरान डॉ अम्मार रिजवी ने श्री नृपेन्द्र मिश्र को अवगत कराया कि वर्ष 1983 में श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में 14 कोसीय परिक्रमा मार्ग के निर्माण कार्य का दायित्व उनके द्वारा निभाया गया था तथा उस समय वहां शिलान्यास का पत्थर भी स्थापित कराया गया था। उन्होंने बताया कि परिक्रमा मार्ग के विस्तार के दौरान वह शिलापट्ट कहीं लुप्त हो गया। डॉ रिजवी ने आग्रह किया कि यदि वह मूल शिलापट्ट उपलब्ध हो सके तो उसे पुनः उसी स्थान पर स्थापित कराया जाए और यदि वह न मिले तो उसके स्थान पर नया शिलापट्ट लगाया जाए, जिससे उस ऐतिहासिक कार्य का दस्तावेजी महत्व सुरक्षित रह सके।
बैठक में जनपद सीतापुर स्थित पौराणिक एवं आध्यात्मिक धाम नैमिषारण्य के समग्र विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डॉ अम्मार रिजवी ने बताया कि वर्ष 1981 में उन्होंने तत्कालीन राज्यपाल स्वर्गीय सी.पी.एन. सिंह से अनुरोध किया था कि नैमिषारण्य में “नैमिषारण्य रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर एंशिएंट इंडियन लैंग्वेजेज एंड कल्चर” नाम से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध संस्थान स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट आज भी उत्तर प्रदेश शासन के अभिलेखों में उपलब्ध होगी। डॉ रिजवी ने कहा कि नैमिषारण्य वह ऐतिहासिक भूमि है जहां वेद, पुराण और उपनिषदों पर वर्षों तक मंथन हुआ और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व के सामने प्रस्तुत किया गया। ऐसे में यहां वैश्विक स्तर का शोध एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र स्थापित होना समय की बड़ी आवश्यकता है।
इस अवसर पर डॉ अम्मार रिजवी ने महमूदाबाद स्थित मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज, साइंस एंड टेक्नोलॉजी परिसर में निर्मित विश्व शांति केंद्र की जानकारी भी श्री मिश्र को दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में क्षेत्रीय विधायक आशा मौर्य एवं राज्यसभा सदस्य संजय सेठ का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है। डॉ रिजवी ने श्री नृपेन्द्र मिश्र को महमूदाबाद एवं विश्व शांति केंद्र आने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया।
भेंट के दौरान जनपद सीतापुर के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और प्रशासनिक विकास पर भी गहन चर्चा हुई। डॉ अम्मार रिजवी ने कहा कि जिस प्रकार चित्रकूट को कमिश्नरी का दर्जा प्राप्त है, उसी प्रकार धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद सीतापुर को भी कमिश्नरी का दर्जा दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मुलाकात के दौरान श्री नृपेन्द्र मिश्र स्वयं डॉ अम्मार रिजवी को साथ लेकर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निवास सहित विभिन्न प्रधानमंत्रियों से जुड़े संग्रहालयों का अवलोकन कराने पहुंचे। प्रधानमंत्री संग्रहालय की ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक जानकारी साझा करते हुए उन्होंने देश के प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक विकास की अनेक महत्वपूर्ण बातों पर भी चर्चा की। इस आत्मीयता एवं सम्मान के लिए डॉ अम्मार रिजवी ने श्री मिश्र के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
डॉ अम्मार रिजवी ने कहा कि श्री नृपेन्द्र मिश्र एक अत्यंत ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, विद्वान एवं जनहित के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने कहा कि श्री मिश्र का व्यक्तित्व एक चुम्बक की भांति है, जो प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश एवं केंद्र सरकार में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और कई विभागों में ऐतिहासिक सुधार कर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
डॉ रिजवी ने विशेष रूप से कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण में श्री नृपेन्द्र मिश्र का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व, दूरदृष्टि एवं प्रशासनिक क्षमता ने इस ऐतिहासिक कार्य को नई दिशा दी है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए श्री मिश्र का चयन करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की।
डॉ अम्मार रिजवी ने यह भी कहा कि श्री नृपेन्द्र मिश्र स्वामी स्वामी विवेकानंद के गहरे अध्येता एवं भक्त हैं। स्वामी विवेकानंद के जीवन, दर्शन और विचारों पर उनकी जानकारी अत्यंत व्यापक एवं प्रेरणादायक है, जो बहुत कम लोगों में देखने को मिलती है।
