डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा
भाग–1 : समता-सूर्य उदय (100 दोहे)
(1)
जय भीम का ऊँचा ध्वज, जग में फैले शोर।
संविधान का दीप यह, उजियारे हर ओर॥
(2)
जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, फोड़ी अंधी राह।
ज्ञान दिया हर जन को, कर दी जीवन चाह॥
(3)
श्रमिक, किसान, दलित निराश, सबको दी पहचान।
भीम विचार का नाद है, भारत की शान॥
(4)
अंधकार में दीप थे, जब नभ था बेजान।
भीमराव ने की जगत में, नव संविधान॥
(5)
कानूनी भाषा में लिखा, जनमन का इतिहास।
न्याय-समानता का दिया, अमर उपदेश प्रकाश॥
(6)
महासंघ की शपथ यही, मानवता का धर्म।
संविधान ही देवता, सेवा ही कर्म॥
(7)
अशिक्षा की जंजीर को, तोड़ा ज्ञान पुकार।
साक्षरता से नव युग आया, भीम थे आधार॥
(8)
दलितों के मस्तक चढ़ी, आत्मगौरव माला।
संविधान की छत्रछाया, भीम की दीवाला॥
(9)
सत्य अहिंसा का पथ दिखाया, बुद्ध विचार अपनाए।
भीमपथ का जो भी चलता, मानव धर्म निभाए॥
(10)
संविधान के अक्षर बोले, न्याय-समान विचार।
हर नागरिक का हो सम्मान, यही भीम उपहार॥
(11)
भूख-प्यास से जूझता, श्रमिक जब रोया रात।
भीम उसे अधिकार दिलाए, दी नव सौगात॥
(12)
कर्मभूमि संसद बनी, लेखनी बनी तलवार।
अन्यायों के विरुद्ध चली, जनशक्ति अपार॥
(13)
भीमराव का जीवन है, संघर्षों की गाथा।
हर आँसू ने गढ़ दिया, नव युग की परिभाषा॥
(14)
महासंघ का स्वर गूंजे, संविधान का मान।
दलित-पिछड़ों संग उठे, भारत महान॥
(15)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, तीन दीप प्रज्वाल।
भीम का यह मंत्र अमर, जन जन में लाल॥
(16)
कायम रहे संविधान का, हर अक्षर साकार।
लोकतंत्र की नींव यही, सबसे मजबूत आधार॥
(17)
महासंघ के हर सदस्य का, एक यही संदेश।
न्याय-समानता बिन नहीं, सच्चा देश विशेष॥
(18)
अंधभक्ति का अंत कर, विवेक दीप जलाए।
भीमविचार के अनुयायी, जग में मान बढ़ाए॥
(19)
सत्ता का जब खेल हुआ, छला गया इंसान।
भीम खड़े थे सच्चाई से, बोले संविधान॥
(20)
संविधान के पृष्ठों में, जन का जीवन बसता।
हर अनुच्छेद में चमके, भीम का नाता सच्चा॥
(21)
अंग्रेजों की बेड़ी टूटी, पर मन अब भी दास।
भीम उठे जब मंच पर, गूंजा नव विकास॥
(22)
समान अवसर हर जन को, यह था भीम विचार।
कर्म से ही ऊँचाई मापो, यही जग का सार॥
(23)
जात-पात को दूर कर, मानवता का नाम।
भीम ने भारत में किया, समता का प्रचाम॥
(24)
नारी को सम्मान दे, शिक्षा का वरदान।
संविधान ने खोलीं राहें, जग में पहचान॥
(25)
महासंघ का गीत यही, सेवा धर्म महान।
भीमविचार अमर रहे, जन जन के प्राण॥
(26)
न्याय-समानता के बिना, लोकतंत्र अधूरा।
भीमराव का स्वप्न था, हर मन हो पूरा॥
(27)
धन नहीं, ज्ञान ही असली, शक्ति बने समाज।
भीमपथ यह सिखलाए, तोड़े हर लाज॥
(28)
संविधान की शपथ लेकर, चलें सदा औदार्य।
मानवता के व्रत धरे, करें नव निर्माण कार्य॥
(29)
महासंघ का दीप जले, भीम विचार समेट।
हर दलित के स्वप्न में, न्याय का गीत बहे॥
(30)
जय संविधान! जय भीम! यही महासंघ नाद।
भारत भू पर गूंज उठे, मानवता प्रसाद॥
डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा
भाग–1 : समता-सूर्य उदय (दोहा 31–100)
(31)
भीम नाम का अर्थ है, अंधकार का अंत।
अन्यायों की भीड़ में, सत्य रहे संत॥
(32)
पढ़ लिखकर जब बोले भीम, गूंजे देश उजियार।
शब्द बने थे शक्ति तब, शासन हुआ लाचार॥
(33)
कानपुर से संसद तक, भीम चले निर्भीक।
कर्मपथ पर सत्य था, वाणी में संगीत॥
(34)
महासंघ की नींव में, श्रमिक जन की पीर।
दलितों की वह आह थी, जिसने दी तक़दीर॥
(35)
विनम्रता में वीरता, और वाणी में आग।
भीम खड़े थे सत्य पर, टूटे सब अभाग॥
(36)
संविधान के अनुच्छेद, जीवन का प्रकाश।
हर नागरिक को दे रहा, समानता का विश्वास॥
(37)
महासंघ का हर सदस्य, कर्म करे निश्छल।
जनहित को ही मान ले, अपना जीवन फल॥
(38)
जाति धर्म से ऊपर उठ, मानवता को गले।
भीम बताएं राह जो, उसी दिशा चले॥
(39)
वोट नहीं बस चेतना, यही भीम का भाव।
लोकतंत्र में जन बने, शासन का प्रभाव॥
(40)
राजनीति में नैतिकता, भीम का बड़ा उपदेश।
बिना नीति के देश क्या, मिटेगा हर शेष॥
(41)
अस्पृश्यता का कलंक जो, सदी सदी का दाग।
भीम ने धो डाला उसे, लिख दी नई जाग॥
(42)
संविधान की हर पंक्ति, लिखी लहू से भीम।
जनमन में जोश भर गई, टूटी हर जंजीम॥
(43)
नौजवान उठ खड़े हुए, ज्ञान हुआ हथियार।
भीमविचार के दीप से, जग में फैला प्यार॥
(44)
महासंघ की रीत यही, सेवा बन परमार्थ।
न्याय-समानता धर्म बन, चलो भीम के साथ॥
(45)
सत्ता का वह सिंहासन भी, झुके विचार महान।
भीमराव के नाम पर, गूंजा हिंदुस्तान॥
(46)
महासंघ का नारा गूंजे, “संविधान है जान।”
दलित-पिछड़ा एक हो, बने भारत महान॥
(47)
पाठशालाओं में गूंजे, बुद्ध विचार के गीत।
शिक्षा ही वह शस्त्र है, तोड़े हर प्रतीत॥
(48)
महासंघ की यात्रा में, कर्मपथ हो शुद्ध।
भीम विचार की धारा से, मिटे अंधी बुद्ध॥
(49)
समान अवसर सबको दो, यह भीम का उपदेश।
मेहनत से ही ऊँचाई, यही जग का संदेश॥
(50)
संविधान का रक्षक बन, महासंघ उठे।
अन्यायों के जाल को, सत्य से काटे॥
(51)
दलित, किसान, मजदूर संग, बने विकास प्रवाह।
भीम के शब्दों से मिले, नव भारत की राह॥
(52)
महिलाओं को भी मिले, शिक्षा का अधिकार।
भीम ने समाज में किया, मानवता विस्तार॥
(53)
भीमराव के एक हस्ताक्षर, बदले भाग्य हजार।
संविधान में अंकित हुआ, भारत का आधार॥
(54)
संविधान न केवल ग्रंथ, जीवन का विज्ञान।
हर जन में विद्यमान है, भीम का सम्मान॥
(55)
शोषित, पीड़ित, वंचित जन, पाओ अब अधिकार।
भीम तुम्हारे संग हैं, मिटेगा अंधकार॥
(56)
महासंघ का दीप जले, न्याय बने निशान।
दलितों के होठों पर, मुस्कान बने गान॥
(57)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, जीवन का संदेश।
भीम के इस तीन मंत्र से, जगे जन-प्रदेश॥
(58)
भ्रष्टाचार की दीवारें, ढहें सत्य की चोट।
संविधान का पालन ही, सच्ची जन की वोट॥
(59)
भीम का नाम अमर रहे, जन-जन का विश्वास।
महासंघ की शपथ यही, सबको दे उल्लास॥
(60)
समता का जो दीप जले, वही सच्चा धर्म।
भीमराव ने सिखलाया, मानवता का कर्म॥
(61)
संविधान की शक्ति से, जग में शांति छाए।
न्याय समानता से ही, नव युग बन जाए॥
(62)
सत्ता जब अन्याय करे, महासंघ ललकार।
भीमपथ पर चल पड़े, जन जन की पुकार॥
(63)
दलितों की आवाज है, भीमपथ का गीत।
जिसमें गूंजे समता का, अमर संगीत॥
(64)
महासंघ की शपथ यही, देश बने समभाव।
जाति-धर्म का हो न भेद, बस मानवता भाव॥
(65)
असमानता की रात को, भोर बनाएं भीम।
हर जन को अधिकार दे, मिटा दें सीम॥
(66)
संविधान की आत्मा में, छिपा है करुण भाव।
जनसेवा ही श्रेष्ठ कर्म, यही भीम प्रभाव॥
(67)
कर्म से ही पहचान हो, जाति से न माप।
भीम यही उपदेश दे, तोड़े हर पाप॥
(68)
श्रम की महिमा गाई जो, वही सच्चा वीर।
महासंघ के कर्मठ जन, करें नित नूतन पीर॥
(69)
अंबेडकर का नाम लो, भीम पथ अपनाओ।
संविधान की राह पर, जन जन को लाओ॥
(70)
समाज सुधारक भीम थे, मानवता का दीप।
हर युग में गूंजेगा नाम, उनके शब्द अतीव॥
(71)
महासंघ का विस्तार हो, हर जिले हर गाँव।
संविधान का मान रखे, हर भारतवासी नाम॥
(72)
समानता की फसल उगे, मिटे द्वेष का बीज।
भीम विचार के खेत में, उगे प्रेम का सीज॥
(73)
न्याय बिना प्रगति नहीं, यही संविधान कहे।
जन-जन में जागे विवेक, मानवता सहे॥
(74)
महासंघ का ध्वज लहराए, नीला नभ में शान।
जय संविधान! जय भीम! बने जग पहचान॥
(75)
शिक्षा मंदिर हर गाँव में, खुले उजियारा द्वार।
भीमपथ पर चल पड़ा, भारत का परिवार॥
(76)
राज्य नीति की धार से, मिटे अन्याय निशान।
संविधान की शक्ति से, बदले हिंदुस्तान॥
(77)
दलित पीड़ित संगठित हों, तोड़े बंधन जाल।
भीमपथ पर चल पड़ें, मिटे हर विकार॥
(78)
महासंघ का आह्वान है, उठो जागो जनमान।
संविधान का गीत गाओ, बनो महान॥
(79)
अंधविश्वास मिटा दो, ज्ञान बने प्रकाश।
भीमराव के पथ पे चलो, यही सच्चा विकास॥
(80)
महासंघ के मंच से, गूंजे सच्चा स्वर।
मानवता की जीत ही, भीम का है वर॥
(81)
बुद्ध, भीम, और संविधान, तीन दीप समान।
तीनों की ज्वाला से बने, मानवता महान॥
(82)
महासंघ की पुकार है, शिक्षा हर जन पाय।
ज्ञान बिना समाज में, समता न आए॥
(83)
न्यायालय से संसद तक, गूंजे एक विचार।
संविधान की गरिमा रखे, भारत सदा अपार॥
(84)
भीमपथ का अनुसरण, हर बालक सीखे।
जाति-भेद की दीवारें, एक दिन ढही के॥
(85)
महासंघ का कर्म यही, सेवा धर्म महान।
दलितोद्धारक भीम का, चलता अभियान॥
(86)
जाति रहित जो देश हो, वही सच्चा स्वराज।
संविधान से ही मिले, हर मन को आवाज॥
(87)
अंधकार पर प्रहार कर, जलाए ज्ञानदीप।
भीमराव के अनुयायी, करें सत्य प्रतीक॥
(88)
नारी शक्ति का मान कर, बढ़ा समभाव प्रीत।
महासंघ के मंच पर, गूंजे नव संगीत॥
(89)
भीमपथ का साधक बन, जो जन सेवा करे।
वह सच्चा अनुयायी है, जो अन्याय हरे॥
(90)
संविधान ही धर्म है, यह संदेश महान।
महासंघ का नाद गूंजे, गाए हिंदुस्तान॥
(91)
भूख न रहे, न भेद हो, यही भीम विचार।
समान अवसर हर जन को, मिले अधिकार॥
(92)
संविधान का रक्षक हो, हर जनमानस आज।
महासंघ के अनुशासन से, मिटे अन्याय का राज॥
(93)
भीमराव की प्रेरणा से, जन जन में बल आए।
संविधान की चेतना, हर हृदय बस जाए॥
(94)
महासंघ का दीप जलाए, सत्य और न्याय।
संविधान का अनुशासन ही, मानवता की माया॥
(95)
जाति नहीं पहचान अब, कर्म बने आधार।
भीम का यह सन्देश है, जीवन का सार॥
(96)
महासंघ की छाया में, सुख का सागर हो।
हर गरीब का जीवन भी, शिक्षा से भरपूर हो॥
(97)
संविधान का गान सदा, बच्चों के मुख से।
भीमराव का नाम जपे, भारत हर सुख से॥
(98)
श्रमिक, किसान, मजदूर संग, बने एक परिवार।
भीमविचार का घर बने, यह जग अपार॥
(99)
महासंघ का ध्वज लहराए, सत्य का परचाम।
संविधान के अनुयायी हों, जन जन में नाम॥
(100)
जय भीम! जय संविधान! जय मानवता धर्म।
महासंघ का यह प्रण रहे, सेवा ही कर्म॥
डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा
भाग–2 : संविधान की ज्योति (दोहा 101–200)
इस भाग में डॉ. अंबेडकर के वैचारिक योगदान, संवैधानिक चेतना और महासंघ के मिशन को समर्पित 100 नए दोहे प्रस्तुत हैं।
(101)
संविधान की ज्योति से, जग में फैला प्रकाश।
अंधकार अब मिट गया, आया नव विश्वास॥
(102)
भीमराव के कर्म से, जग ने जाना सत्य।
ज्ञान बना अस्त्र जब, टूटा अन्याय पथ्य॥
(103)
जाति नहीं इंसानियत, भीम का था विचार।
हर मानव का हो सम्मान, यही सच्चा प्यार॥
(104)
संविधान का अर्थ है, सबको हो अधिकार।
भेद-भाव का अंत हो, न्याय मिले अपार॥
(105)
महासंघ के अनुयायी, करें सच्ची साध।
भीमपथ के दीप से, जग में फैलें वाद॥
(106)
शिक्षा का उपहार दो, हर घर हो विद्यालय।
भीमराव के स्वप्न से, मिटे अन्याय जाल॥
(107)
दलितों की आवाज़ में, भीम का जोश समाए।
संविधान की शक्ति से, हर अन्याय ढह जाए॥
(108)
महासंघ का मिशन यही, ज्ञान बने हथियार।
अन्यायों से युद्ध कर, पाओ सच्चा प्यार॥
(109)
भीम विचार की मशाल से, जलता हर मन दीप।
न्याय-समानता का बन, भारत हो अतीव॥
(110)
संगठन की शक्ति से, पर्वत भी झुके।
संविधान का धर्म यही, एकता के ध्वज फहरें॥
(111)
श्रमिक-किसान की पुकार, महासंघ सुने।
संविधान का नियम यही, सब मिल साथ बने॥
(112)
महासंघ का गीत गाओ, भीमपथ अपनाओ।
मानवता का धर्म यही, प्रेम-पथ दिखलाओ॥
(113)
जात-पात की दीवारें, टूटें ज्ञान के बल।
भीम के उपदेश से ही, जग में हो सरल॥
(114)
संविधान की शक्ति से, भारत जाग उठा।
न्याय-समानता की धुन, जन-जन में गूंज उठा॥
(115)
महासंघ की रीत यही, सेवा धर्म महान।
संविधान का पालन ही, सच्चा हिंदुस्तान॥
(116)
भीमराव ने दी दिशा, मानवता का मोल।
संविधान के अक्षरों में, छिपा सत्य अनमोल॥
(117)
अंधविश्वास मिटा दिया, तर्क बना आधार।
भीमराव की सोच से, निकला नव विचार॥
(118)
महासंघ के हर जन का, यह पावन अभियान।
संविधान की रक्षा में, दे जीवन बलिदान॥
(119)
दलित, पिछड़े, शोषित सब, बने एक परिवार।
भीम विचार के सागर में, करें प्रेम विस्तार॥
(120)
महासंघ का यह प्रण है, हर मन में हो प्रकाश।
संविधान के रक्षक बन, करें जग उजास॥
(121)
नारी शक्ति संग उठे, शिक्षा का अभियान।
भीमराव के आशीष से, बदले हिंदुस्तान॥
(122)
महासंघ का नारा गूंजे, “न्याय हो समान।”
दलित-पिछड़ा, सब मिलें, बनें देश महान॥
(123)
संविधान की आत्मा है, समता की पुकार।
हर जन में अधिकार हो, यही भीम विचार॥
(124)
भेद मिटाओ, प्रेम बढ़ाओ, यही महासंघ वचन।
संविधान की राह पर, हो मानवता सृजन॥
(125)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, यह मंत्र महान।
भीमराव के शब्द में, बसा जन कल्याण॥
(126)
संविधान का पालन ही, सबसे बड़ा तप।
जो इसे निभाए सदा, वही मानव सब॥
(127)
महासंघ के कर्मवीर, सजग सदा तैयार।
न्याय-धर्म के पथ पर, करें जन प्रचार॥
(128)
दलितोद्धार की ज्योति जले, सबको दे उजास।
संविधान के पथ पर चल, बने जन विकास॥
(129)
भीमराव के मार्ग पर, चलना ही उपकार।
जात-पात से मुक्त हो, बने देश महान॥
(130)
महासंघ का ध्येय यही, मानवता विस्तार।
संविधान के दीप से, जग हो जगमगदार॥
(131)
शोषण का इतिहास मिटे, उठे नया समाज।
संविधान की छत्रछाया में, मिले सबको काज॥
(132)
भीमराव का स्वप्न था, हर जन हो स्वतंत्र।
भेदभाव के नाम पर, न हो कोई बंध॥
(133)
महासंघ के मंच से, उठे जन-स्वर नाद।
संविधान के गान से, मिटे हर विवाद॥
(134)
न्याय-समानता का बने, मानव का आधार।
संविधान की ज्योति से, मिटे अंधकार॥
(135)
भीमपथ का अनुयायी, सच्चा देश भक्त।
जो संविधान निभाए, वही श्रेष्ठ व्यक्त॥
(136)
महासंघ की लहर उठी, न्याय-सागर पार।
दलितों का अधिकार अब, होगा साकार॥
(137)
संविधान का धर्म यही, प्रेम और विवेक।
भीमराव का नाम ही, सच्चा दीप एक॥
(138)
महासंघ का कर्म यही, संगठित हो जन।
न्याय-समानता से बने, सच्चा भारत धन॥
(139)
संविधान का आदर कर, जीवन पथ सजाओ।
भीमराव के शब्दों को, कर्म में अपनाओ॥
(140)
नवयुग का निर्माण हो, शिक्षा की पुकार।
महासंघ का दीप बने, हर जन का आधार॥
(141)
दलित पीड़ित जन-जन में, नई चेतना आई।
भीमराव की वाणी से, दुनिया मुस्काई॥
(142)
महासंघ की एकता, भारत की पहचान।
संविधान के पथ पे चल, बन सच्चा इंसान॥
(143)
जाति रहित समाज हो, भीम का है सपना।
संविधान की शक्ति से, मिटे अन्याय अपना॥
(144)
संगठन की शक्ति से, उठे समता राग।
भीमराव के अनुयायी, करें नव परवाग॥
(145)
महासंघ का दीप जले, हर गाँव नगर में।
संविधान का नाद बजे, जन के स्वर में॥
(146)
शिक्षा के हर बीज से, उगे नई फसल।
भीमराव के पथ पर, भारत हो सफल॥
(147)
संविधान की नींव में, जनता का विश्वास।
महासंघ के कर्म से, आए नव प्रकाश॥
(148)
दलितोद्धार की ज्योति से, जग में फैले प्रेम।
भीम विचार का हो प्रभाव, मिटे हर नेम॥
(149)
महासंघ का ध्वज उठाओ, नीला नभ में शान।
संविधान के अनुयायी, गाएं जय-गान॥
(150)
भीमराव का नाम गूंजे, हर जन के मन में।
संविधान की बात रहे, हर भाषण-वचन में॥
(151)
श्रमिक किसान उठे सब, संग करें संघर्ष।
संविधान की शक्ति से, मिटे अन्याय का गर्व॥
(152)
महासंघ की राह चले, मानवता का फूल।
भीमविचार की छाया में, मिटे हर शूल॥
(153)
संविधान की आत्मा में, है जन का विश्वास।
भीमराव के शब्द से, हुआ भारत खास॥
(154)
महासंघ का नारा गूंजे, “सत्य हो आधार।”
संविधान का पालन हो, सच्चा उपहार॥
(155)
शिक्षा से ही शक्ति है, यह भीम ने बताया।
अनपढ़ मन में भी ज्ञान, दीपक बन जलाया॥
(156)
महासंघ के वीर जन, रखें दृढ़ संकल्प।
संविधान की शपथ लें, न्याय बने विकल्प॥
(157)
दलितों का उत्थान हो, भीम यही पुकार।
संविधान के मार्ग पर, बने जन आधार॥
(158)
महासंघ का कर्म यह, प्रेम और परमार्थ।
संविधान की छाया में, शुद्ध बने हर अर्थ॥
(159)
भीमराव की दृष्टि से, बदल गया समाज।
अब अन्याय न टिक सके, जग में कोई राज॥
(160)
महासंघ का आह्वान है, मानवता की जीत।
संविधान का गान सदा, गूंजे हर संगीत॥
(161)
भेदभाव की बेड़ी तोड़ो, बनो विवेकवान।
संविधान का पालन ही, सच्चा सम्मान॥
(162)
महासंघ का दीप जले, सत्य का उजियार।
भीम विचार का नाम हो, जन-जन में पुकार॥
(163)
अशिक्षा मिटे सदा, जागे हर मन ज्ञान।
भीमराव के आदर्श से, बने देश महान॥
(164)
संविधान की राह चले, जनजन एक साथ।
महासंघ का लक्ष्य यही, मानवता की बात॥
(165)
संगठन की शक्ति से, अंधकार हो खत्म।
भीमपथ का अनुयायी, बने जगत का मित्र॥
(166)
महासंघ के कर्मवीर, करें देश निर्माण।
संविधान के पालन से, बढ़े भारत मान॥
(167)
भीमराव के नाम पर, उठे समता गीत।
दलित-पिछड़ों संग बजे, मानवता संगीत॥
(168)
संविधान का धर्म यही, समानता का मंत्र।
महासंघ का दीप बने, जनसेवा का केंद्र॥
(169)
भूख-प्यास मिटे सदा, शिक्षा का हो राज।
भीम विचार का पथ यही, सच्चा स्वराज॥
(170)
संविधान की नींव में, न्याय-सत्य का भाव।
महासंघ का आचरण, करे इसे प्रभाव॥
(171)
शोषण पर जो प्रहार करे, वही सच्चा वीर।
भीमराव की वाणी से, बदले तक़दीर॥
(172)
महासंघ का संदेश है, एकता का मान।
संविधान के अनुयायी, बने जग सम्मान॥
(173)
दलित पीड़ित संगठित हों, भीम विचार के साथ।
संविधान की शक्ति से, खुले न्याय के पथ॥
(174)
महासंघ की वाणी में, गूंजे सच्चा स्वर।
संविधान की रक्षक हो, यह जनशक्ति अमर॥
(175)
भीमराव के आदर्श से, नव युग की शुरुआत।
संविधान के पालन से, जगे हर प्रभात॥
(176)
महासंघ का दीप जले, हर दिल में उजियार।
संविधान का पालन हो, जीवन का आधार॥
(177)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, तीन रत्न समान।
भीम विचार का सार यही, बने भारत महान॥
(178)
संविधान की धारा में, न्याय-समानता बहे।
महासंघ की चेतना, हर दिल में रहे॥
(179)
भेद मिटे, प्रेम बढ़े, यही भीम उपदेश।
महासंघ का ध्येय यही, जनकल्याण विशेष॥
(180)
संविधान का गान सदा, गूंजे जन समाज।
भीमराव के नाम से, मिटे अन्याय का राज॥
(181)
महासंघ की राह चले, शिक्षा का प्रचार।
भीमपथ का अनुयायी, बने हर परिवार॥
(182)
संविधान के रक्षक बन, खड़े रहें सदा।
न्याय-समानता का ध्वज, ऊँचा रहे अदा॥
(183)
महासंघ का कार्य यही, जन में चेतना लाना।
भीमराव का नाम सदा, दिलों में बसाना॥
(184)
शोषण का इतिहास मिटे, उठे मानव मान।
संविधान की छत्रछाया, बने सदा वरदान॥
(185)
दलितों के संग महासंघ, करे नया सृजन।
संविधान के पालन से, जग में हो जीवन॥
(186)
भीमराव के चरणों में, न्याय-सत्य का सार।
संविधान की हर धरा, बने उजियार॥
(187)
महासंघ का दीप बने, सत्य का प्रतीक।
संविधान की शक्ति से, हो भारत अद्वितीय॥
(188)
जात-पात का अंत कर, मानवता का धर्म।
भीमराव ने गढ़ दिया, जीवन का मर्म॥
(189)
महासंघ की लहर उठे, बने जन आंदोलन।
संविधान की नींव में, रखे समर्पण॥
(190)
भीम विचार की रौशनी, फैलाए नव ज्ञान।
संविधान के अनुयायी, बनें जन महान॥
(191)
महासंघ का गीत बजे, मानवता की तान।
भीमराव की गाथा से, चमके हिंदुस्तान॥
(192)
संविधान का अर्थ यही, समानता की जीत।
महासंघ का व्रत यही, न्याय हो अतीत॥
(193)
शिक्षा से ही स्वतंत्रता, यह भीम ने कहा।
ज्ञान बिना जीवन अधूरा, सत्य यही रहा॥
(194)
महासंघ के अनुयायी, करें नव निर्माण।
संविधान की ज्योति से, बने सशक्त हिंदुस्तान॥
(195)
दलित-पिछड़ा संग उठे, करें जन उत्थान।
भीम विचार का दीप जले, बढ़े सम्मान॥
(196)
महासंघ का ध्येय यही, समता का संकल्प।
संविधान के पालन से, सजे नव विकल्प॥
(197)
भीमराव के स्वप्न को, जन-जन तक पहुँचाओ।
संविधान की राह से, नव भारत बनाओ॥
(198)
महासंघ का नारा गूंजे, “न्याय हो महान।”
संविधान की आत्मा से, बने देश महान॥
(199)
भीम विचार अमर रहे, जन-जन का विश्वास।
महासंघ का यह प्रण है, जग में उजियास॥
(200)
जय संविधान! जय भीम! जय मानवता धर्म।
महासंघ का यह संकल्प, सेवा ही कर्म॥
