डा. अम्बेडकर संवैधानिक महासंघ (50 दोहे)
1.
जय भीम का ऊँचा ध्वज, फैले चारों ओर।
महासंघ का नाद गूंजे, भारत भू पर शोर॥
2.
संविधान की ज्योति से, मिटे अज्ञान तमाम।
समानता का दीप है, भीम का यह धाम॥
3.
अन्यायों से जूझकर, लिखी नयी पहचान।
अम्बेडकर ने गढ़ दिया, भारत का विधान॥
4.
संगठित जन चेतना, उठे हृदय में शौर्य।
संविधान का धर्म है, सत्य, न्याय और गौर्य॥
5.
महासंघ का मंत्र है, “संविधान का मान।”
दलित, श्रमिक, किसान सब, एक समान सम्मान॥
6.
शोषण के उस युग में, भीम जले अंगार।
जागे दलित, उपेक्षित, टूटा अन्यायकार॥
7.
क़लम बनी तलवार जब, भीम ने उठाई।
गूंज उठी संसद धरा, शोषण थी मिटाई॥
8.
महासंघ का उद्देश्य है, मानवता का गीत।
संविधान के मूल में, एकता की प्रीत॥
9.
बुद्ध-भीम का पथ चला, विवेक और ज्ञान।
अंधविश्वास मिटे सदा, बढ़े सत्य अभियान॥
10.
न्याय, समता, भ्रातृभाव, भीम का संदेश।
महासंघ के कार्य में, यही सत्य परिवेश॥
11.
जात-पात की दीवार को, गिरा चलो सब साथ।
संविधान का धर्म है, समानता का पथ॥
12.
महासंघ के रथ पे अब, बैठे जाग्रत लोग।
अन्यायों के विरुद्ध यह, चेतनता का योग॥
13.
हर पंचायत, हर गली, उठे यही पुकार।
अम्बेडकर का मार्ग ही, जीवन का आधार॥
14.
महासंघ के कार्य में, शिक्षा प्रथम चिन्ह।
ज्ञान बिना जीवन अधूरा, अंधकार गहन॥
15.
न्यायालय में गूंजते, शब्द अमर-संविधान।
भीमकृत यह लेख है, भारत की पहचान॥
16.
महासंघ का आह्वान है, एकता की राह।
संविधान का पालन ही, सबसे बड़ी चाह॥
17.
राज्य चले न मनमानी से, जनता की हो जीत।
लोकतंत्र की नींव में, समानता की रीत॥
18.
भीम की शिक्षा अमर रहे, जनमन में प्रकाश।
संविधान के अनुशासन से, बढ़े देश का वास॥
19.
महासंघ के हर कदम में, सामाजिक सुधार।
दलित, किसान, मज़दूर सब, बनें देश आधार॥
20.
नारी का भी अधिकार है, भीम ने यह कहा।
सम्मान से जीने का हक़, सबको है मिला॥
21.
शिक्षा से ही मुक्ति है, भीम का यह उपदेश।
अन्यायों की जंजीरों से, तब मिले अवशेष॥
22.
संविधान का हर अनुच्छेद, भीम का अमृत ज्ञान।
समान अवसर दे रहा, हर भारत नागरिक को मान॥
23.
महासंघ जब साथ है, न हो कोई भय।
भीम का विचार अमर रहे, जन-जन का अभय॥
24.
संघर्षों की राह पर, बढ़े महासंघ वीर।
अन्यायों से लड़ रहा, संविधान अधीर॥
25.
नौजवान अब जाग उठा, लेके हाथ में ज्ञान।
भीम के आदर्श से बने, भारत महान॥
26.
मंदिर-मस्जिद एक साथ, संविधान का भाव।
समानता का सूरज है, भीम का यह गाँव॥
27.
वोट की शक्ति समझ लो, यही असली बल।
भीम ने जो सिखलाया, रखो उसे संबल॥
28.
महासंघ की शपथ है, धर्म न हो व्यापार।
मानवता ही मूल है, यही भीम का सार॥
29.
हर दफ़्तर में, हर गली, संविधान की गूंज।
भीम का भारत बन रहा, चेतनता का पूंज॥
30.
शोषण, अन्याय मिटे जब, जनता हो शिक्षित।
महासंघ का सपना तब, साकार प्रतिष्ठित॥
31.
भ्रष्टाचार मिटे सदा, हो नैतिक शासन।
संविधान का मूल यही, जनहित का दर्शन॥
32.
अम्बेडकर का संदेश है, परिश्रम का मान।
मेहनत से ही बढ़ सके, भारत का सम्मान॥
33.
महासंघ के सदस्यों का, एक ही संकल्प।
न्याय, समता, शिक्षा का, हो जन-जन में अंकुरण॥
34.
भीम का नाम अमर रहे, जैसे गंगा धार।
जन-जन के अधिकार में, बसे संविधान अपार॥
35.
जाति-धर्म का जाल तोड़, मानवता का गीत।
महासंघ का दीप है, सबको दे प्रेरित॥
36.
आओ मिलकर शपथ लें, भीम के पद-पंथ।
संविधान की लाज रखे, हर भारतवंत॥
37.
दलित, पिछड़े, आदिवासी, सबके अधिकार।
संविधान के बल से ही, बने भारत पार॥
38.
महासंघ का लक्ष्य है, सेवा और न्याय।
भीमपथ पर चल रहा, जनहित का आयाय॥
39.
संविधान की रक्षा में, लगे महासंघ वीर।
भीमकृत यह पथ बना, भारत का नज़ीर॥
40.
हर शाखा में उठता स्वर, “जय संविधान!”
महासंघ के संग चले, भारत का मान॥
41.
भीम का नाम दीपक है, जो अंधकार हराय।
महासंघ का कार्य ही, जनता को जगाय॥
42.
शिक्षा, संगठन, संघर्ष से, बदलेगी तस्वीर।
संविधान का धर्म यही, सच्चा भविष्य धीर॥
43.
न्याय के हर पंथ में, भीम रहे आधार।
महासंघ का ध्वज बना, समानता का द्वार॥
44.
भेद मिटे, प्रेम बढ़े, यही मिशन महान।
संविधान की शक्ति से, जगमग भारत ध्यान॥
45.
महासंघ के रथ चले, जन-जन के द्वार।
भीम विचार अमर रहे, जागे हर परिवार॥
46.
शोषित-पीड़ित एक हों, संगठित समाज।
संविधान का व्रत यही, यही भीम का राज॥
47.
बुद्ध, भीम, संविधान का, अटूट यह मेल।
महासंघ के हाथ में, जनशक्ति का खेल॥
48.
समान अधिकारों का पर्व, महासंघ मनाय।
संविधान के पथ पर ही, भारत मुस्काय॥
49.
संविधान की छत्रछाया, सबको दे अधिकार।
भीम का भारत गूंजता, जय-जय संविधान॥
50.
जय भीम का ऊँचा ध्वज, लहराए संसार।
महासंघ का नाम गूंजे, भारत हो साकार॥

