डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ — 101 दोहे
(भाग 1 – प्रेरणा और आदर्श)
जय भीम का नारा गूंजे, भारत भू पर शोर।
महासंघ का नाम लेकर, जन-जन करे गौर॥
जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, दी ज्ञान की डोर।
भीम विचार अमर बने, भारत भू पर जोर॥
अंधकार में दीप बन, भीम चले थे नीर।
सत्य-समानता का दिया, किया जगत गंभीर॥
शिक्षा का उपहार दे, भीम हुए उदार।
ज्ञान से ही मुक्ति है, यही उनका विचार॥
संघर्षों की आग में, तपकर निकले शुद्ध।
दलितों के उद्धार में, भीम हुए प्रदुद्ध॥
बुद्ध के करुणा पंथ से, भीम हुए प्रेरित।
मानवता का धर्म ले, हुए जनोचित हित॥
अन्यायों की ज्वाला में, उठी नई पुकार।
भीम बने संविधान के, जग में अवतार॥
सत्य, अहिंसा, करुणा संग, लिखी नई कहानी।
भीमराव के नाम से, जग में आई वाणी॥
जात-पात के दलदल से, निकाला भारत देश।
संविधान का मर्म दिया, जन-जन में संदेश॥
महापुरुष वो अद्भुत थे, जिनसे उजली भोर।
भीमपथ का नाम है, मानवता का शोर॥
(भाग 2 – संविधान और समानता)
कलम उठाई भीम ने, लिखा जन का भाग्य।
संविधान की धार से, टूटी सत्ता त्याग्य॥
कानूनों में न्याय है, भीम की पहचान।
संविधान का मूल है, जनता का सम्मान॥
अधिकारों की ज्योति से, जगमग हुआ देश।
भीम विचार अब हो गए, भारत के उपदेश॥
समानता का धर्म ले, जग में फैला ज्ञान।
महासंघ का मिशन यही, समता का सम्मान॥
संविधान का मंत्र है, सबको न्याय मिले।
धर्म-जाति का भेद जो, मिटकर सच्चा खिले॥
जनता की सरकार हो, जनता की आवाज़।
भीम का यह उपदेश है, लोकतंत्र का राज॥
शासन जनता का रहे, जनता की हो जीत।
भीम विचार का अर्थ है, सच्चाई की रीत॥
न्यायालय में गूंजता, संविधान का नाम।
भीमराव का वचन है, भारत की पहचान॥
कानून से बढ़कर नहीं, कोई भी हुकूमत।
भीम विचार यह सिखाए, सबको हो अमूमत॥
समान अवसर सबको दे, शिक्षा का अधिकार।
भीम विचार की नींव है, जनहित का आधार॥
(भाग 3 – समाज सुधार और संगठन)
नारी का सम्मान कर, भीम बढ़ाए भाग।
महासंघ के कार्य में, यही सच्चा राग॥
मजदूरों के हित लिए, भीम बने अवतार।
श्रम से बढ़ता देश है, यह सच्चा विचार॥
किसान पसीने से सजे, धरती माँ का गान।
महासंघ का प्रण यही, उनका हो सम्मान॥
अंधविश्वास मिटाओ अब, ज्ञान करो विस्तार।
भीम विचार का मंत्र यही, शिक्षा से उद्धार॥
भाईचारे का बंधन हो, मन में प्रेम अपार।
महासंघ का नाद यही, मानवता प्रचार॥
सवर्ण-अवर्ण सभी एक, यही भीम संदेश।
समरसता के पथ चले, हो भारत विशेष॥
बालक-बाला सब पढ़ें, यही हो अभियान।
संविधान की राह से, बढ़े भारत महान॥
दलित-पिछड़े एक हों, यही हो संकल्प।
महासंघ के मार्ग से, मिटे अन्याय दंभ॥
धर्म नहीं पर कर्म बड़ा, भीम कहा बार-बार।
कर्मयोग ही साधना, जीवन का आधार॥
बुद्ध-भीम का मेल है, ज्ञान और नीति।
महासंघ की कार्यशैली, प्रेम और प्रीति॥
राजनीति में नीति हो, समाज में सद्भाव।
भीम विचार का मार्ग है, सच्चा जनचाव॥
नारी को शिक्षा मिले, बने सशक्त नारी।
भीम विचार यह कहते, यही विजयकारी॥
भेदभाव की आग में, न जलें कोई भी जन।
संविधान की छाँव में, रहे समता धन॥
श्रमिक हो या व्यापारी, सबका मान समान।
भीम बताए धर्म यही, यही सच्चा ज्ञान॥
महासंघ का कार्य यह, सेवा जनकल्याण।
भीम विचार की ज्योति से, बढ़े भारत प्राण॥
भ्रष्टाचार और अत्याचार, दोनों का अंत।
संविधान की शक्ति से, मिटे पाप-वंत॥
सच्चाई से चलने वाला, ही सच्चा भीमपंथ।
महासंघ का रथ बढ़े, न्यायिक संतुलन॥
शिक्षा-संगठन-संघर्ष, तीन दीप जलाए।
भीम बताए यह सूत्र, मानवता अपनाए॥
समाज में जो विभाजन है, मिटे बुद्ध विचार।
संविधान की छाँव में, मानवता अपार॥
नवयुवक अब जाग उठो, बनो परिवर्तन शक्ति।
भीम विचार का दीप लो, यही सच्ची भक्ति॥
(भाग 4 – महासंघ का संदेश और संकल्प)
महासंघ का ध्वज रहे, ऊँचा और महान।
संविधान के साथ हो, भारत की पहचान॥
न्याय-समानता के संग, बढ़े जन अभियान।
महासंघ का नारा यही, संविधान महान॥
एकता का दीप जले, सबको मिले अधिकार।
भीम विचार की शक्ति से, मिटे अत्याचार॥
सेवा धर्म, सत्य जीवन, यही महासंघ ध्येय।
भीम की वाणी साथ है, यही हमारा नेय॥
शिक्षा, श्रम, संगठन, तीनों की हो जीत।
महासंघ का कर्म यही, समता की रीत॥
संविधान की रक्षा में, महासंघ तत्पर।
भीम विचार के संग रहे, जन-जन अमर॥
संविधान का गान करें, हर विद्यालय में।
भीम बने प्रेरणा-स्रोत, हर परिवार में॥
महासंघ का पथ यही, जनहित की पुकार।
न्याय-समानता की दिशा, जीवन का आधार॥
शोषित-वंचित सब मिलें, बने नया समाज।
भीम विचार से बढ़े अब, मानवता का राज॥
जय भीम का नारा बजे, हर दिल-दिलदार।
संविधान की लहर चले, भारत अपार॥
महासंघ की रग-रग में, भीम विचार समाए।
जन-जन के अधिकार हेतु, हर द्वार जगाए॥
बंधुता का बंधन जोड़ो, सबको प्रेम सिखाओ।
संविधान का धर्म यही, नफरत दूर भगाओ॥
किसान खेत में खुश रहे, मजदूर पाए मान।
महासंघ का प्रण यही, हो सबका उत्थान॥
समाज का हर वर्ग अब, पढ़े संविधान।
भीम विचार के अनुयायी, बनें राष्ट्र महान॥
आस्था और कर्म में, सच्चाई का मेल।
महासंघ का धर्म यही, प्रेम और खेल॥
नारी की गरिमा रखो, दो शिक्षा का वरदान।
भीम विचार यह कहते, यही जीवन प्राण॥
दलित, पिछड़े, आदिवासी, सबको मिले स्थान।
संविधान का न्याय यही, यही सच्चा मान॥
अन्याय का अंत करो, फैलाओ सद्भाव।
महासंघ का कार्य यही, जन-जन में प्रभाव॥
शिक्षा ही शस्त्र बने, अज्ञान मिटाए दूर।
भीम विचार के दीप से, जागे हर मज़दूर॥
महासंघ का नाम गूंजे, चारों दिशाओं में।
संविधान का गीत बजे, जन की भावनाओं में॥
भीमराव के पथ चले, बने नया इतिहास।
महासंघ का कार्य है, जनहित का प्रकाश॥
सेवा को ही धर्म मान, कर्म करो निरंतर।
भीम बताए यही सूत्र, बनो जन के अंतर॥
कानून सबके लिए समान, यही भीम विचार।
महासंघ का मंत्र यही, जन की जय-जयकार॥
विज्ञान और नीति से, बढ़े देश महान।
संविधान की नींव यही, ज्ञान और सम्मान॥
शिक्षा का प्रचार करो, हर गांव हर गली।
भीमपथ से बढ़े समाज, मिटे झूठ-भुली॥
महासंघ के रथ पर अब, चले नवयुग प्रकाश।
संविधान के ज्ञान से, मिटे अंधकार नाश॥
नारी, दलित, किसान सब, साथ बढ़ें समान।
महासंघ का धर्म यही, मानवता अभियान॥
संवैधानिक चेतना, जन-जन में फैलाओ।
भीम विचार के सागर से, प्रेम सुधा बरसाओ॥
अन्यायों के पर्वत को, तोड़ो जन-बल से।
महासंघ का लक्ष्य यही, उन्नति जल से॥
बुद्ध विचार और भीमपथ, एक ही दिशा।
संविधान की वाणी में, मानवता की इच्छा॥
जनसंसद में गूंजे स्वर, संविधान महान।
महासंघ का जयघोष हो, भारत की पहचान॥
स्वतंत्रता का अर्थ यही, न्याय मिले सबको।
भीम विचार का धर्म यही, मान मिले सबको॥
संविधान के पथ पर ही, भारत का उत्थान।
महासंघ का कर्म यही, जनता का सम्मान॥
शिक्षित समाज बने जहाँ, शोषण न हो स्थान।
भीम विचार से हो खड़ा, नव भारत महान॥
शांति, प्रीति, नीति का, हो संयम संवाद।
महासंघ का संदेश यह, सत्य और प्रसाद॥
समानता का दीप जले, हर मन हर गाँव।
संविधान की छाँव में, मिटे दुख और दाव॥
दलित-वंचित सब मिलें, हो नव निर्माण।
भीम विचार की शक्ति से, बढ़े जन सम्मान॥
महासंघ की वाणी में, संविधान का गीत।
भीम का संदेश यही, सच्चाई की जीत॥
हर मंदिर हर पाठशाला, पढ़े संविधान।
भीम विचार का यह युग, हो जन कल्याण॥
समाज में जो अंधकार, मिटे शिक्षा से।
भीम का नाम अमर रहे, हर दिशा में॥
सत्य और समरसता का, दीप जले निरंतर।
महासंघ का कार्य यही, हो जन कल्याणकर॥
अन्यायों के विरुद्ध अब, उठे जन आवाज़।
भीम विचार का मंत्र यही, हो जनता का राज॥
कानून की मर्यादा का, रखो सदा ध्यान।
महासंघ का धर्म यही, हो जनता का मान॥
जाति-पात की दीवारें, गिरा दो एक साथ।
संविधान की शपथ ले, बढ़ो मानव पथ॥
महासंघ का जयघोष हो, गूंजे चारों ओर।
संविधान का नाद बजे, भारत भू पर शोर॥
न्याय-समानता की ज्योति, फैले गाँव-गाँव।
भीम विचार से रोशन हो, हर भारत नाम॥
शिक्षा से ही क्रांति हो, ज्ञान से उत्थान।
महासंघ का लक्ष्य यही, जन-जन का सम्मान॥
संविधान की रौशनी, फैलाओ जग में।
भीम विचार के दीप जले, भारत अग में॥
सेवा, सत्य, सादगी, बनें जीवन मूल।
भीम बताए यही पथ, हो जन हितकूल॥
महासंघ की शक्ति से, देश बने महान।
संविधान का गौरव हो, सदा भारत प्राण॥
दलितों की आवाज़ को, दो अधिकार समान।
भीम विचार का अर्थ यही, जनता का सम्मान॥
न्याय बिना समाज क्या, अन्याय की रीत।
संविधान का धर्म यही, सत्य की जीत॥
बंधुता का दीप जलाओ, सब मिल प्रेम से।
महासंघ का गान बजे, भीम के नेम से॥
शिक्षा, श्रम, आत्मबल, तीन दीप प्रज्वाल।
भीम विचार का धर्म यह, मानवता विशाल॥
नारी को शिक्षा मिले, बढ़े उसकी चाल।
महासंघ का प्रण यही, हो सबका भाल॥
धर्म से बढ़कर नीति है, भीम कहा यही।
संविधान का पथ चले, मानवता सही॥
भीमराव का नाम लो, जीवन में उतारो।
संविधान की लहर से, हर द्वार संवरो॥
अन्याय मिटे, समानता फैले, यही अरमान।
महासंघ का कार्य यही, जनता का सम्मान॥
बुद्ध-भीम की शिक्षा से, बने नया समाज।
संविधान की ज्योति में, हो सबका राज॥
जय भीम का नारा बजे, संविधान महान।
महासंघ का ध्वज लहराए, भारत की पहचान॥
अंतिम दोहा —
भीम विचार अमर रहे, जन-जन के अरमान।
महासंघ का जयघोष हो, संविधान महान॥
अंतिम वंदना:
जय भीम! जय संविधान! जय महासंघ!
न्याय, समानता, बंधुता – यही सच्चा संग!!

