बिहार विधानसभा चुनाव 2025: नए समीकरण, नई चुनौतियां
बिहार में इस बार का विधानसभा चुनाव बेहद खास माना जा रहा है। पिछली बार 2020 में हुए चुनाव में NDA को बहुमत मिला था और जेडीयू (JDU) के नेता नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि अगस्त 2022 में उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ लिया और आरजेडी (RJD) के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। पर यह गठबंधन भी ज्यादा दिन नहीं चला और जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी मारते हुए एनडीए के साथ सरकार बना ली।
अब 2025 का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार राज्य की राजनीति में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज पूरी 243 सीटों पर मैदान में हैं। जन सुराज की बढ़ती लोकप्रियता और रैलियों में उमड़ती भीड़ ने पारंपरिक दलों को चिंतित कर दिया है। सवाल यह है कि क्या यह भीड़ वोटों में तब्दील होगी या नहीं।
आरजेडी जहां यादव-मुस्लिम समीकरण पर भरोसा कर रही है, वहीं जेडीयू अपनी शासन-नीतियों और विकास कार्यों को मुद्दा बना रही है। भाजपा (BJP) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर निर्भर है, जबकि कांग्रेस अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में है।
इस बार मतदाता बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर गंभीर हैं। बिहार की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां लोग केवल गठबंधन नहीं, बल्कि स्थिरता और विकास की मांग कर रहे हैं।
देखना यह होगा कि क्या प्रशांत किशोर की जन सुराज पारंपरिक राजनीति की जड़ों को हिला पाएगी या फिर सत्ता की बागडोर एक बार फिर पुराने दलों के ही हाथों में लौटेगी।
