संवाददाता – मंडल ब्यूरो चीफ
राजीव कुमार सिंह सिकरवार
आगरा, उत्तर प्रदेश
संवाददाता – मंडल ब्यूरो चीफ
राजीव कुमार सिंह सिकरवार
आगरा, उत्तर प्रदेश
शीत लहर से पशुधन की सुरक्षा हेतु एडवाइजरी जारी
आगरा, 19 दिसंबर 2025।
शीत लहर की शुरुआत और तापमान में लगातार गिरावट को देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डेय ने पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने पशुपालकों से पालतू पशुओं को ठंड से बचाने की समुचित व्यवस्था करने तथा आम नागरिकों से निराश्रित पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखते हुए उनके संरक्षण की अपील की है।
एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि ठंड के कारण पशु-पक्षियों का शरीर तापमान कम होने से वे बीमार हो सकते हैं, दुग्ध उत्पादन में कमी आ सकती है, प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुपालक रात्रि में पशु आवास को चारों ओर से ढककर ठंडी हवाओं से बचाएं तथा पशुओं को गर्म कपड़े या जूट के बोरे से ढकें। संतुलित आहार में गन्ने का चारा, हरा चारा, भूसा-पराली, सरसों एवं मूंगफली की खल तथा गुड़ शामिल करें। सूर्य प्रकाश युक्त शेड बनाएं और दिन में पशुओं को धूप में बांधें।
नवजात पशु शिशुओं को खीस व कोलेस्ट्रम अवश्य पिलाएं। पशु आवास में अलाव जलाते समय रोशनदान खुले रखें ताकि धुआं बाहर निकल सके। फर्श को सूखा रखें तथा पुआल या भूसा बिछाएं। पशुओं को ताजा या गुनगुना पानी पिलाएं तथा प्रसव के बाद मां को अजवाइन मिला गुनगुना पानी दें।
भेड़-बकरियों का समय पर टीकाकरण कराएं तथा गर्भवती पशुओं और नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल करें। पशुओं के कान में टैग लगवाकर पशुपालन विभाग की निःशुल्क सुविधाओं का लाभ लें। किसी भी बीमारी की स्थिति में नजदीकी पशु चिकित्सालय या हेल्पलाइन 1962 पर संपर्क करें। आपदा के कारण पशु की मृत्यु होने पर राजस्व विभाग से राहत राशि हेतु संपर्क करने की सलाह दी गई है।
साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि शीत लहर के दौरान पशुओं को मेले में न ले जाएं, ठंडा चारा या रात का ठंडा पानी न पिलाएं, पशु आवास में अत्यधिक धुआं न करें, मृत पशुओं को सड़क किनारे न फेंकें तथा अलाव के पास छोटे पशु बच्चों को खुला न छोड़ें, बल्कि सुरक्षित रूप से बांधकर रखें।
आगरा, 19 दिसंबर 2025।
शीत लहर की शुरुआत और तापमान में लगातार गिरावट को देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डेय ने पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने पशुपालकों से पालतू पशुओं को ठंड से बचाने की समुचित व्यवस्था करने तथा आम नागरिकों से निराश्रित पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखते हुए उनके संरक्षण की अपील की है।
एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि ठंड के कारण पशु-पक्षियों का शरीर तापमान कम होने से वे बीमार हो सकते हैं, दुग्ध उत्पादन में कमी आ सकती है, प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुपालक रात्रि में पशु आवास को चारों ओर से ढककर ठंडी हवाओं से बचाएं तथा पशुओं को गर्म कपड़े या जूट के बोरे से ढकें। संतुलित आहार में गन्ने का चारा, हरा चारा, भूसा-पराली, सरसों एवं मूंगफली की खल तथा गुड़ शामिल करें। सूर्य प्रकाश युक्त शेड बनाएं और दिन में पशुओं को धूप में बांधें।
नवजात पशु शिशुओं को खीस व कोलेस्ट्रम अवश्य पिलाएं। पशु आवास में अलाव जलाते समय रोशनदान खुले रखें ताकि धुआं बाहर निकल सके। फर्श को सूखा रखें तथा पुआल या भूसा बिछाएं। पशुओं को ताजा या गुनगुना पानी पिलाएं तथा प्रसव के बाद मां को अजवाइन मिला गुनगुना पानी दें।
भेड़-बकरियों का समय पर टीकाकरण कराएं तथा गर्भवती पशुओं और नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल करें। पशुओं के कान में टैग लगवाकर पशुपालन विभाग की निःशुल्क सुविधाओं का लाभ लें। किसी भी बीमारी की स्थिति में नजदीकी पशु चिकित्सालय या हेल्पलाइन 1962 पर संपर्क करें। आपदा के कारण पशु की मृत्यु होने पर राजस्व विभाग से राहत राशि हेतु संपर्क करने की सलाह दी गई है।
साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि शीत लहर के दौरान पशुओं को मेले में न ले जाएं, ठंडा चारा या रात का ठंडा पानी न पिलाएं, पशु आवास में अत्यधिक धुआं न करें, मृत पशुओं को सड़क किनारे न फेंकें तथा अलाव के पास छोटे पशु बच्चों को खुला न छोड़ें, बल्कि सुरक्षित रूप से बांधकर रखें।

