प्रदेश सरकार की रोजगारपरक योजनाओं में बकरी पालन योजना गरीब, मजदूर, किसानों और महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा जरिया बनकर उभरी है। कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित इस योजना का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना है। खास बात यह है कि इसमें मात्र 10 प्रतिशत निवेश कर लाभार्थी 90 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान प्राप्त कर सकता है, जिससे कम पूंजी में बेहतर आय का रास्ता खुलता है। योजना के तहत एक यूनिट में 1 नर और 5 मादा बकरियां दी जाती हैं, जिसकी कुल लागत 45,000 रुपये है। इसमें से 40,500 रुपये सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिए जाते हैं, जबकि केवल 4,500 रुपये लाभार्थी को वहन करने होते हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए यह सहायता और भी बढ़कर 60,000 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है।
सरकार ने इस योजना को वर्ष 2021-22 से पूरे प्रदेश में लागू किया है और लगातार इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार सैकड़ों लाभार्थियों को योजना का लाभ देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
योजना की पात्रता के तहत लाभार्थी का उत्तर प्रदेश का निवासी होना, आयु 18 वर्ष से अधिक होना और बकरी पालन का प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। इसके साथ ही बाड़ा/सेड और चारागाह की व्यवस्था भी जरूरी है।
इस योजना की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि प्रदेश में पहली बार बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा शुरू की गई है। 70 जनपदों में 980 केंद्रों के माध्यम से यह कार्य किया जा रहा है, जिससे बकरियों की नस्ल सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बकरी पालन योजना न केवल ग्रामीण युवाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन स्तर में सुधार ला रही है। बकरी पालन योजना आज प्रदेश के गरीब परिवारों के लिए “आर्थिक क्रांति” का जरिया बनती जा रही है, जो कम लागत में स्थायी आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत रास्ता दिखा रही है।

