बांदा में आयोजित अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा की बैठक सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और संगठनात्मक एकता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुई। बड़े बाईपास स्थित द्वारिका प्रसाद फौजी के परिसर में आयोजित इस बैठक में समाजोत्थान, शिक्षा और सामाजिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पीके विश्वकर्मा ने शिरकत की, जबकि अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रामबाबू विश्वकर्मा ने की। पदाधिकारियों ने वरिष्ठजनों का बैज अलंकरण और माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया।मुख्य अतिथि प्राचार्य पीके विश्वकर्मा ने कहा कि समाज को सबल बनना होगा, क्योंकि निर्बल समाज कभी अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो समाज को नई दिशा और पहचान देती है। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित और प्रोत्साहित किए जाने पर भी जोर दिया, ताकि नई पीढ़ी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो।पूर्व शिक्षक फूलचंद्र विश्वकर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि बेटों और बेटियों को समान रूप से शिक्षित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि समाज और परिवार के भविष्य का मजबूत आधार समझें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी बच्चे को पीछे रहने देने की मानसिकता समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।कार्यक्रम का संचालन जिला कोषाध्यक्ष मनबोधन विश्वकर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। गाजीपुर में हुए सजातीय बालिका हत्याकांड में दोषियों के खिलाफ हुई कार्रवाई समाज के संगठित विरोध और जागरूकता का परिणाम है, जिसने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट होता है तो न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
महासचिव के पी विश्वकर्मा, हेडमास्टर अरविंद विश्वकर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी समाज में शिक्षा, संगठन और जागरूकता को मजबूत करने पर बल दिया।इस अवसर पर जिला मीडिया प्रभारी ललित विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त लिपिक रामप्रसाद विश्वकर्मा, आर्यावर्त बैंक कैशियर शिवलाल बाबू, परमहंस, रामौतार विश्वकर्मा, खिलाड़ी संजू विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी समाज का वास्तविक उत्थान केवल आर्थिक संसाधनों से नहीं, बल्कि शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक एकता से संभव होता है।
