बांदा में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जिस मामा की उंगली पकड़कर एक मासूम भरोसे से चलता है, उसी मामा ने अपने 10 वर्षीय भांजे का अपहरण कर उसकी जान के बदले 10 लाख रुपये की फिरौती मांग डाली। लेकिन अपराध की इस खौफनाक पटकथा के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की तत्परता, तकनीकी दक्षता और साहस ने 30 घंटे के भीतर न सिर्फ मासूम को सकुशल बरामद कर लिया, बल्कि पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।बबेरू कस्बे के औगांसी रोड निवासी अनिल विश्वकर्मा का पुत्र हर्षित विश्वकर्मा गुरुवार को रोज की तरह स्कूल गया था। राष्ट्रीय बाल शिक्षा निकेतन विद्यालय में कक्षा 4 का छात्र हर्षित जब दोपहर तक घर नहीं पहुंचा तो परिवार की बेचैनी भय में बदल गई। पिता विद्यालय पहुंचे तो पता चला कि छुट्टी के बाद बच्चा निकल चुका था। उसके दोस्त कृष्णा से पूछताछ में खुलासा हुआ कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास बाइक सवार एक व्यक्ति ने हर्षित को बुलाकर कहा, “आओ घर चलते हैं।” परिचित चेहरा होने के कारण बच्चा उसके साथ चला गया और फिर अचानक गायब हो गया।सूचना मिलते ही बबेरू कोतवाली पुलिस हरकत में आ गई। कोतवाली प्रभारी राजेन्द्र सिंह रजावत के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गईं। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधार पर जांच शुरू हुई। धीरे-धीरे शक परिवार के करीबी दायरे में पहुंचा और जो सच सामने आया उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।मासूम का अपहरण उसके सगे मामा रामजी ने अपने साथियों के साथ मिलकर किया था। आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए फिरौती मांगनी शुरू की ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। उसने अपनी ही बहन को बेटे की हत्या की धमकी देते हुए 10 लाख रुपये की मांग की।
लेकिन यहां पुलिस की रणनीति अपराधियों पर भारी पड़ गई। बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कुछ रुपये ऑनलाइन स्कैनर के माध्यम से भेजे और बाकी रकम भेजने का भरोसा दिलाया। इसी दौरान पुलिस आरोपी की हर डिजिटल गतिविधि पर पैनी नजर बनाए रही।पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल और अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज लगातार कर रहे थे। वहीं क्षेत्राधिकारी बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी खुद पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर फिरौती से जुड़े कॉल और संदेशों की निगरानी कर रहे थे।उधर आरोपी बच्चे को लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते हरियाणा की ओर निकल गया। उसने पुलिस को भ्रमित करने के लिए गाड़ी में दूसरी कार का फास्टैग लगा रखा था, लेकिन पुलिस ने एक्सप्रेस-वे की टाइमिंग के आधार पर 24 संदिग्ध वाहनों को चिन्हित कर उनकी गतिविधियां खंगालनी शुरू कीं।मामले में सबसे अहम सुराग आरोपी द्वारा भेजा गया वीडियो बना। परिजनों की मांग पर भेजे गए वीडियो में कमरे की दीवार पर बनी विशेष पेंटिंग और सफेद चादर वाला बेड दिखाई दिया। पुलिस ने इसी वीडियो से अंदाजा लगा लिया कि बच्चा किसी होटल में ठहराया गया है।
तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो क्लू के आधार पर पुलिस टीम हरियाणा के रोहतक पहुंची। वहां संदिग्ध वाहन होटल के बाहर खड़ा मिला। होटल मैनेजर ने बच्चे की तस्वीर देखकर पुष्टि की कि तीन लोग बच्चे के साथ होटल में ठहरे हैं। पुलिस ने जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी बाहर से लौटा, उसे दबोच लिया गया। इसके बाद कमरे का दरवाजा खुलवाकर बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया और मासूम हर्षित को सकुशल बरामद कर लिया गया।
जब शाम 6:15 बजे वीडियो कॉल पर हर्षित की बात उसकी मां से कराई गई तो वहां मौजूद हर आंख नम हो उठी। रोती हुई मां ने पूछा, “कैसा बिटवा तू?” इस पर मासूम मुस्कराकर बोला, “मां मैं ठीक हूं, मुझे पापा मिल गए हैं।” यह संवाद केवल एक मां की राहत नहीं, बल्कि पुलिस की उस सफलता का प्रतीक बन गया जिसने एक परिवार को टूटने से बचा लिया।जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी रामजी पहले भी विवादित गतिविधियों में शामिल रहा है और परिवार ने उससे संबंध समाप्त कर दिए थे।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी हाईटेक क्यों न हो जाए, आधुनिक तकनीक और सतर्क पुलिसिंग के सामने उसकी उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती। बबेरू पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक अपहरण का खुलासा नहीं, बल्कि कानून के प्रति लोगों के भरोसे को मजबूत करने वाला उदाहरण बन गई है।
