दवा विक्रेता समिति, गोरखपुर की एक महत्वपूर्ण बैठक आज संगठन के अध्यक्ष योगेन्द्र नाथ दूबे एवं महामंत्री आलोक चौरसिया के नेतृत्व में शहर के एक होटल में सम्पन्न हुई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने आगामी 20 मई 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद के समर्थन में पूर्ण सहभागिता का निर्णय लिया।
बैठक में दवा व्यापार में उत्पन्न हो रही विभिन्न समस्याओं, संगठन की मजबूती, व्यापारियों की सुरक्षा, एकता एवं भावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही दवा व्यापार से जुड़े दीर्घकालिक लक्ष्यों, चुनौतियों एवं संगठनात्मक प्रगति पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में निम्न प्रमुख विषयों पर विशेष चर्चा की गई—
* संगठन की नीतियाँ, मिशन एवं विज़न
* दवा व्यापारियों के हित एवं सुरक्षा
* नई तकनीक एवं आधुनिक विचारों के माध्यम से व्यापार को सशक्त बनाना
* संगठन के सकारात्मक उद्देश्यों को प्रत्येक थोक एवं फुटकर दवा व्यापारी तक पहुँचाना
* सदस्यों की प्रतिभा, सहभागिता एवं संगठनात्मक सक्रियता को प्रोत्साहित करना
बैठक में जानकारी दी गई कि ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे एवं राष्ट्रीय महासचिव राजीव सिंघल के आह्वान पर देशभर में 20 मई 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद आयोजित किया जा रहा है।
प्रदेश संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स उत्तर प्रदेश (OCDUP) के प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर सिंह एवं प्रदेश महासचिव सुधीर अग्रवाल ने बताया कि देशभर के लगभग 12.40 लाख दवा व्यापारी एवं वितरक वर्तमान समय में अवैध ई-फार्मेसी संचालन, बड़े कॉरपोरेट घरानों द्वारा अपनाई जा रही प्रिडेटोरी प्राइसिंग (अत्यधिक छूट देकर बाजार पर कब्जा) तथा कोविड काल में जारी अधिसूचना G.S.R. 220(E) के दुरुपयोग जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। इससे छोटे एवं मध्यम दवा व्यापारियों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है।
समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र नाथ दूबे एवं महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य एवं रोगी सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की उपलब्धता, एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग, नकली प्रिस्क्रिप्शन, अनुचित भंडारण तथा एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
समिति ने केंद्र एवं राज्य सरकार से निम्न मांगें प्रमुखता से उठाईं—* अवैध ई-फार्मेसी संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
* अधिसूचना G.S.R. 817(E) दिनांक 28.08.2018 एवं G.S.R. 220(E) दिनांक 26.03.2020 को वापस लिया जाए।
* बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा अपनाई जा रही प्रिडेटोरी प्राइसिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए।
* पारंपरिक एवं लाइसेंसधारी दवा व्यापारियों तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
समिति ने आमजन से अपील की है कि 20 मई 2026 को प्रस्तावित बंदी को देखते हुए आवश्यक दवाओं की व्यवस्था पूर्व में ही कर लें, जिससे किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
दवा विक्रेता समिति, गोरखपुर ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार जनस्वास्थ्य एवं लाखों दवा व्यापारियों की आजीविका से जुड़े इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर आवश्यक कदम उठाएगी।
बैठक में संयोजक संतोष श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष अनुराग चंदवासिया, संगठन मंत्री विनोद गुप्ता, दिलीप गुप्ता* *कार्यकारिणी सदस्य अवनीश अग्रवाल, रोहित बंका, राजीव त्रिपाठी, अभिषेक गुप्ता, शैलेश तिवारी, अमित पोद्दार, निकुंज अग्रवाल, पंकज शर्मा, मनोज गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, अनुपम खेतान, पंकज अग्रवाल, कौशल गाड़िया, मुरलीधर गुप्ता, संजीव दुबे, अभिषेक त्रिपाठी, राहुल चोखानी, प्रशांत तिवारी, सुरेश गुप्ता, गौतम कमलिया, संदीप गुप्ता, रजनीश उपाध्याय, सुनील चंद, अजय शंकर ओझा, अमित भालोटिया , प्रमोद अवस्थी, अमित श्रीवास्तव, दिनेश भागवानी, प्रदीप गुप्ता, फिरोज खान, शिव शंकर गुप्ता, आदित्य मद्धेशिया सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

