आमोद कुमार
बांदा, 25 मई। सभ्यताएँ केवल इमारतों, स्मारकों और ग्रंथों में नहीं बसतीं, बल्कि उन स्मृतियों, लोकपरंपराओं और ज्ञान की अमूल्य धरोहरों में जीवित रहती हैं जिन्हें पीढ़ियाँ अपने साथ लेकर चलती हैं। समय के साथ जब ये धरोहरें उपेक्षा और क्षरण का शिकार होने लगती हैं, तब उनका संरक्षण केवल सांस्कृतिक दायित्व नहीं बल्कि ऐतिहासिक आवश्यकता बन जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से बांदा जनपद में प्राचीन पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों और बुंदेली सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण का महत्वपूर्ण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इतिहास की अनेक अमूल्य धरोहरें समय के प्रभाव, प्राकृतिक क्षति और संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुँच जाती हैं। यदि इन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाए तो न केवल उनका स्थायी संरक्षण संभव होगा, बल्कि शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए भी यह ज्ञान-संपदा सुलभ हो सकेगी।इसी उद्देश्य को मूर्त रूप देने के लिए बांदा जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जा चुकी है, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनपद में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान कर उनके संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।इस मिशन की विशेषता केवल लिखित धरोहरों तक सीमित नहीं है। बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली लोककलाओं, पारंपरिक लोकनृत्यों, चित्रकला और अन्य सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का भी डिजिटल अभिलेखीकरण किया जाएगा। तर्कसंगत दृष्टि से देखें तो किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक शक्ति केवल उसके इतिहास में नहीं, बल्कि उसकी जीवंत लोक परंपराओं में निहित होती है। यदि इन परंपराओं का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से दूर होती जाएँगी। इसलिए यह अभियान सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का भी माध्यम बन सकता है।प्रशासन ने इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, मठ-मंदिरों तथा सामाजिक संगठनों से अपील की है कि उनके पास उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियाँ, हस्तलिखित ग्रंथ, दुर्लभ दस्तावेज अथवा लोककला से जुड़ी सामग्री मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, बांदा में उपलब्ध कराएँ, ताकि उनका डिजिटलीकरण और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।वास्तव में, तकनीक तभी सार्थक होती है जब वह अतीत को भविष्य से जोड़ने का माध्यम बने। ज्ञान भारतम् मिशन इसी दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास प्रतीत होता है, जो बुंदेलखंड की सांस्कृतिक स्मृतियों को समय की धूल से निकालकर डिजिटल दुनिया के स्थायी अभिलेखों में स्थान देने का संकल्प लिए हुए है। यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो बांदा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी प्राप्त करेगी।
