बांदा लगातार बदलते मौसम, बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच पर्यावरणविद एवं समाजसेवी डॉ. रघुराज प्रताप सिंह, जिन्हें “पीपल मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है, ने देशवासियों से एक गहरी और भावुक अपील की है। उनका कहना है कि अब समय चेतावनी से आगे बढ़कर आत्मचिंतन का है—क्योंकि धरती “सहने की सीमा” पार कर चुकी है।हाल ही में देश के कई राज्यों में आई भीषण आंधी-तूफान और प्राकृतिक आपदाओं ने जहां सैकड़ों परिवारों को प्रभावित किया है, वहीं कई लोगों की जान भी चली गई। कहीं घर उजड़ गए, कहीं जीवन भर की मेहनत कुछ ही पलों में समाप्त हो गई। इन्हीं घटनाओं को आधार बनाते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह केवल आपदा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक “सख्त संदेश” है।
उन्होंने कहा— “धरती रो रही है… अब इंसान को फैसला करना होगा कि विकास चाहिए या विनाश।”डॉ. सिंह ने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दुख को शब्दों में बांधना संभव नहीं है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवारों को शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
पर्यावरण संकट पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि लगातार पेड़ों की कटाई, प्रदूषण में वृद्धि, जल स्रोतों का दोहन और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। उनका कहना है कि प्रकृति अब चेतावनी दे रही है, लेकिन यदि अब भी मनुष्य नहीं जागा तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति संरक्षण को अपना “नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य” समझना चाहिए। यदि कहीं अवैध वृक्ष कटाई होती दिखे तो प्रशासन के सहयोग से उसे रोकने का प्रयास किया जाए।साथ ही उन्होंने युवाओं, विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन से मिलकर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।
डॉ. सिंह ने भावुक शब्दों में कहा— “प्रकृति हमारी माँ है। जब पेड़ गिरते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि आने वाला भविष्य कमजोर होता है। यदि आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी।”अंत में उन्होंने देशवासियों से संकल्प लेने की अपील की कि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए और उसकी रक्षा परिवार के सदस्य की तरह करे।
