लखनऊ।
यू.पी. पंचायत चुनाव संघर्ष मोर्चा 2026 के संयोजक राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर पंचायत चुनाव समय पर नहीं करा रहे हैं, जिसके कारण पंचायतों का विकास बाधित हो रहा है और गांवों में विकास की गति पूरी तरह रुकती जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में देरी का सबसे बड़ा नुकसान गरीब, मजदूर, किसान और गांवों में रहने वाले आम लोगों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि पंचायत व्यवस्था कमजोर होने से शासन-प्रशासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए “यू.पी. पंचायत चुनाव संघर्ष मोर्चा 2026” का गठन किया जा रहा है। इस संगठन के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी तथा जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों को सांसदों एवं विधायकों की तरह मानदेय, भत्ता और विकास निधि उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि भी जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि होते हैं और लोकतंत्र को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिस प्रकार सांसद और विधायक जनता द्वारा चुने जाते हैं और उन्हें सभी सुविधाएं दी जाती हैं, उसी प्रकार पंचायत प्रतिनिधियों को भी सम्मान, अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। संविधान सभी को समान अधिकार देता है, इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि प्रत्येक जनपद में अनुभवी अधिवक्ताओं, समाजसेवियों एवं पत्रकार साथियों को संगठन से जोड़ा जाएगा, ताकि पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग आगामी पंचायत चुनाव लड़ना चाहते हैं, चाहे वह जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हो, ग्राम प्रधान का, क्षेत्र पंचायत सदस्य का अथवा ग्राम पंचायत सदस्य का, सभी लोगों को इस संगठन से जोड़कर उनकी आवाज बुलंद की जाएगी।
उन्होंने सभी साथियों से अपील करते हुए कहा कि यदि अपने अधिकार, सम्मान और पंचायतों के विकास की लड़ाई लड़नी है तो एकजुट होकर आगे आना होगा। अब समय आ गया है कि पंचायत प्रतिनिधि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें। उन्होंने कहा, “इस बार अपना हक लेकर रहेंगे और समय पर पंचायत चुनाव कराकर रहेंगे।”
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “जुल्म करने वाले से ज्यादा जुल्म सहने वाला गुनहगार होता है”, इसलिए सभी लोगों को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी है और पंचायत प्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा ग्राम पंचायत, ब्लॉक, तहसील, जिला और प्रदेश स्तर पर बैठकों का आयोजन कर व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर सरकार और चुनाव आयोग को पंचायत चुनाव समय पर कराने के लिए मजबूर किया जाएगा।
इस अवसर पर रेखा रानी एडवोकेट पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट, शकील अहमद एडवोकेट हाई कोर्ट लखनऊ, राजेंद्र प्रसाद भारती एडवोकेट हाई कोर्ट लखनऊ, बंसराज भारतीय वरिष्ठ समाजसेवी, सोनम गौतम, अभय प्रताप सिंह त्यागी, अनुज कुमार गौतम, विनोद कुमार गौतम, डॉ. राम अवतार, अमरेंद्र कुमार, सुनील कुमार चौधरी, बाबूलाल गौतम, राजेश कुमार, सुरेश चंद्र गौतम, डॉ. जगजीवन सिद्धार्थ, नंदलाल गौतम, लक्ष्मी गौतम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों की लड़ाई अब गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी तथा अन्याय और उपेक्षा के खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
