आमोद कुमार
बांदा डा० एस०के० बैस द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गुणवत्तापरक ऊन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पशुपालन विभाग की राज्य योजना के अंतर्गत जनपद में भेड़ पालन को बढ़ावा देने हेतु इच्छुक महिला एवं पुरुष भेड़ पालकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।यह योजना केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का प्रयास भी है। गांवों की परंपरागत आजीविका से जुड़ा भेड़ पालन अब आधुनिक योजनाओं के माध्यम से संगठित स्वरूप ले रहा है, जिससे छोटे, सीमांत और भूमिहीन कृषकों को स्थायी आय का साधन मिल सके।
योजना की कुल लागत 1.70 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें 90 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी, जबकि 10 प्रतिशत अंश लाभार्थी को स्वयं जमा करना होगा। चयनित लाभार्थी को 01 नर मेढ़ा एवं 20 मादा भेड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ बीमा, परिवहन और औषधि जैसी आवश्यक सुविधाएं भी योजना में शामिल हैं।आवेदन प्रक्रिया फिलहाल ऑफलाइन मोड में रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 मई 2026 से 29 मई 2026 तक कार्यालय दिवसों में विकास भवन बाँदा स्थित कमरा नंबर 222 में आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन डाक अथवा सीधे कार्यालय पहुंचकर जमा किए जा सकेंगे।योजना के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि आवेदक जनपद का स्थायी निवासी हो, उसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो तथा वह लघु, सीमांत या भूमिहीन कृषक की श्रेणी में आता हो। साथ ही भेड़ों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान होना अनिवार्य है।सरकार द्वारा जालौनी, मुजफ्फरनगरी, नाली, बीकानेरी, मांगरा तथा मेरिनो नस्ल की भेड़ों के पालन को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना पांच वर्षों तक संचालित रहेगी और लाभार्थियों को शपथ-पत्र भी देना होगा।आवेदन के साथ आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की प्रति, प्रशिक्षण अथवा शैक्षिक प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य रहेगा। चयनित लाभार्थी को अपने बैंक खाते में 17 हजार रुपये की लाभार्थी अंश राशि जमा करनी होगी यह योजना केवल पशुपालन विभाग की औपचारिक पहल नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास है। यदि योजना का क्रियान्वयन पारदर्शी और प्रभावी ढंग से हुआ, तो यह बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन सकती है।
